जामिया मिलिया इस्लामिया का 106वां स्थापना दिवस: छात्र {protests} के चलते नहीं हुआ जश्न

छात्र {protests} के कारण जामिया मिलिया इस्लामिया ने बिना किसी जश्न के अपना 106वां स्थापना दिवस मनाया। जानें क्या है पूरा मामला।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जामिया मिलिया इस्लामिया का 106वां स्थापना दिवस: छात्र {protests} के चलते नहीं हुआ जश्न

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के लिए इस बार का 106वां स्थापना दिवस खुशियों के बजाय तनाव लेकर आया। 29 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी ने अपना स्थापना दिवस तो मनाया, लेकिन कैंपस में जारी छात्र {protests} के कारण कोई आधिकारिक जश्न या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए। माहौल इतना तनावपूर्ण है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को पहले ही 'तालिमी मेला' रद्द करना पड़ा था। स्थापना दिवस के मौके पर केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान व जामिया तरना गाया गया।

दरअसल, कैंपस में पिछले 18 दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग 2006 में भंग किए गए जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को फिर से बहाल करने की है। इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एबिन बेसिल, मोहम्मद जसीम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार, फैजान अली खान और पीएचडी स्कॉलर सनम जैसे छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे और हिरासत में लिए गए साथियों की तत्काल रिहाई की मांग की है।

कैंपस में तनाव और प्रशासन की सख्ती

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तनाव तब और बढ़ गया जब 27 अक्टूबर की रात को कैंपस में व्यापक तोड़फोड़ हुई, जिसमें यूनिवर्सिटी के गेट और दीवारों को नुकसान पहुंचाया गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने हॉस्टलों को 48 घंटे के भीतर बंद करने पर विचार किया है। सुरक्षा के मद्देनजर यूनिवर्सिटी ने सभी कक्षाओं और परीक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया है और लाइब्रेरी भी बंद कर दी गई हैं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 26 अक्टूबर को एक प्रस्ताव रखा था कि संविधान की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर यूनियन चुनाव कराए जाएंगे और निलंबित छात्रों की सदस्यता बहाल की जाएगी। हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि समयसीमा स्पष्ट नहीं है और वे किसी भी तरह की सार्वजनिक माफी की शर्त मानने को तैयार नहीं हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तोड़फोड़ करने वाले असली छात्र नहीं थे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, दिल्ली पुलिस कैंपस में तैनात है और 28 अक्टूबर की सुबह एक पूर्व छात्र सहित दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुलपति मजहर आसिफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस गतिरोध को सुलझाने की कोशिशों में जुटे हैं।

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