छात्र विरोध प्रदर्शन के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया ने रद्द किया फाउंडेशन डे इवेंट

छात्र विरोध प्रदर्शनों और कैंपस में तनाव के कारण जामिया मिलिया इस्लामिया ने अपना 106वां फाउंडेशन डे 'तालिमी मेला' रद्द कर दिया है।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
छात्र विरोध प्रदर्शन के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया ने रद्द किया फाउंडेशन डे इवेंट

दिल्ली की मशहूर यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में तनावपूर्ण माहौल के चलते प्रशासन ने अपने 106वें फाउंडेशन डे समारोह को रद्द करने का फैसला किया है। 'तालिमी मेला' के नाम से मशहूर यह आयोजन 29 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक होना था, लेकिन कैंपस में जारी छात्र विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा कारणों से अब इसे नहीं मनाया जाएगा।

छात्र कल्याण डीन (DSW) द्वारा 21 अक्टूबर को जारी एक आंतरिक सूचना में कहा गया कि कैंपस में हालात सामान्य नहीं हैं। ऐसे में मेहमानों, छात्रों और प्रतिभागियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया। दरअसल, यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी है, जो 22 अक्टूबर तक अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुका था।

छात्रों की मांगें और भूख हड़ताल का असर

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इस पूरे विवाद की शुरुआत 12 अक्टूबर को हुई, जब पांच छात्रों—एबिन बासिल, मोहम्मद जासिम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार और फैजान अली खान ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • 2006 से निष्क्रिय पड़े स्टूडेंट्स यूनियन (छात्र संघ) को फिर से बहाल करना।
  • यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर का इस्तीफा।
  • प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने की गारंटी।

भूख हड़ताल का असर इतना गहरा था कि एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। तनाव तब और बढ़ गया जब 17 अक्टूबर की सुबह करीब 5:30 बजे छात्रों को विरोध स्थल से हटाया गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए NSUI जामिया यूनिट के महासचिव एबिन बासिल को एक साल के लिए रस्टिकेट कर दिया और जासिम अली पर छह महीने का कैंपस बैन लगा दिया।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिरासत की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों को केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कारण हटाया गया था और बाद में उन्हें बिना किसी आरोप के छोड़ दिया गया। सुरक्षा कारणों से यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।

मामले को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी ने 21 अक्टूबर को छात्र संघ के लिए संविधान तैयार करने हेतु पांच सदस्यीय समिति का गठन किया। हालांकि, डीन ने स्पष्ट किया कि चूंकि प्रदर्शनकारी छात्र इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, इसलिए फाउंडेशन डे के कार्यक्रमों को रद्द करना आवश्यक था। इस बीच, सांसद इमरान पटावरी ने भी कैंपस पहुंचकर छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया है। फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक शर्तें बिना शर्त पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

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