जामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन: शिकायतों के समाधान के लिए 7 सदस्यीय पैनल गठित

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) कैंपस में पिछले कुछ समय से जारी तनाव और छात्रों की भूख हड़ताल के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। छात्रों की मांगों को सुनने और कैंपस में दोबारा शांति बहाल करने के लिए यूनिवर्सिटी ने 7 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। यह फैसला 18 अक्टूबर को कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ, रजिस्ट्रार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की एक अहम बैठक के बाद लिया गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पैनल प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत करेगा, उनकी शिकायतों की बारीकी से जांच करेगा और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने की सिफारिश करेगा। रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस समिति में विभिन्न संकायों के डीन और वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल हैं। इसमें प्रोफेसर इकतिदार मोहम्मद खान, प्रोफेसर लुकमान अहमद खान, प्रोफेसर जुबैर मीनाई, प्रोफेसर नीलोफर अफजल, प्रोफेसर तनुजा, प्रोफेसर मिनी एस थॉमस और प्रोफेसर सिमी मल्होत्रा को शामिल किया गया है। डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर इस कमेटी की बैठक बुलाएंगे और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेंगे।
छात्र संघ चुनाव और कैंपस शांति पर प्रशासन का रुख
इस पूरे विवाद के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संघ चुनावों के पुराने मुद्दे पर भी अपनी बात रखी है। प्रशासन ने याद दिलाया कि 2006 में कैंपस में होने वाली हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और कक्षाओं में व्यवधान के कारण छात्र संघ चुनावों को बंद कर दिया गया था। यूनिवर्सिटी ने यह भी जिक्र किया कि 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही के बाद भी प्रशासन को चुनाव कराने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था।
प्रशासन ने बताया कि वर्तमान में यूनिवर्सिटी में 'सब्जेक्ट एसोसिएशन' चुनाव की व्यवस्था है, जिसमें छात्र गुप्त मतदान के जरिए उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव करते हैं। यूनिवर्सिटी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वह आपसी विश्वास और संवाद के जरिए इस मामले को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे कैंपस में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करें ताकि 106 साल पुरानी इस यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा और रैंकिंग बनी रहे और शैक्षणिक माहौल प्रभावित न हो।