जामिया में छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक झड़प, अब ऑनलाइन होंगी कक्षाएं

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक झड़प के बाद प्रशासन ने सभी कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं।

Kittu Kumari24 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जामिया में छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक झड़प, अब ऑनलाइन होंगी कक्षाएं

दिल्ली की मशहूर यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया में तनाव चरम पर है। शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2026 को छात्रों और यूनिवर्सिटी सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई एक हिंसक झड़प के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया है। यह पूरा विवाद जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच शुरू हुआ, जो 2006 से निलंबित है।

घटना के बारे में जानकारी देते हुए रजिस्ट्रार प्रोफेसर मो. महताब आलम रिजवी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद दीवार फांदकर कैंपस में दाखिल हुए, जिससे स्थिति बिगड़ गई और काफी हंगामा हुआ। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि उनके सुरक्षाकर्मियों ने केवल आत्मरक्षा में कदम उठाया। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि बातचीत के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की। इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी ने दिल्ली पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

विवाद की जड़ और अब तक का घटनाक्रम

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छात्रों का यह आंदोलन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अपनाई थी। तनाव तब और बढ़ गया जब 17 अक्टूबर को छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया। प्रशासन ने इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि छात्र निर्धारित गेट नंबर 18 के बजाय किसी अन्य गैर-नामित क्षेत्र में कब्जा कर रहे थे।

इस हंगामे के बीच कुछ छात्रों जैसे जासिम खान, एबिन बेसिल और रेहान हैदर सहित अन्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जिसमें उन्हें रस्टिकेट करना और कैंपस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। इस लड़ाई में NSUI, AISA और JNUSU जैसे संगठनों ने छात्रों का समर्थन किया है।

दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन और कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ का कहना है कि 2006 में यूनियन चुनावों को निलंबित करने का फैसला हिंसा और शैक्षणिक व्यवधान को रोकने के लिए लिया गया था। उनका तर्क है कि विभागीय विषय संघ (departmental subject associations) छात्रों के प्रतिनिधित्व के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, छात्रों की शिकायतों को सुनने के लिए वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की एक सात सदस्यीय समिति बनाई गई है, लेकिन कैंपस में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है।

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