SIR के जरिए भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने का चल रहा है षड्यंत्र: कांग्रेस नेता जयराम रमेश का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

Kittu Kumari21 September 20262 min read2 viewsNational
SIR के जरिए भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने का चल रहा है षड्यंत्र: कांग्रेस नेता जयराम रमेश का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को दिल्ली में मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भारत निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से करोड़ों मतदाताओं के नाम कटने का खतरा पैदा हो गया है और इससे सबसे ज्यादा समाज के पिछड़े और वंचित लोग प्रभावित हो रहे हैं। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सीईओ दिल्ली ने वीआईपी और प्रमुख लोगों को नोटिस भेजे जाने पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, लेकिन असली मुद्दा प्रभावशाली लोगों का नहीं है जो अपना नाम जुड़वाने का रास्ता ढूंढ लेंगे, बल्कि उन आम लोगों का है जो इसके लिए संघर्ष करेंगे। देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5.43 करोड़ भारतीयों को ऐसे नोटिस मिले हैं जिनमें नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग की गई है। इस प्रक्रिया से झुग्गीवासियों, गरीबों और महिलाओं जैसे सबसे सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों पर असर पड़ रहा है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि गणना चरण के दौरान ही 6 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे और अब अतिरिक्त मतदाता भी खतरे में हैं। निर्वाचन आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इसके बाद अब अतिरिक्त 5.4 करोड़ मतदाता क्यों खतरे में हैं। दिल्ली में 54 प्रतिशत मतदाताओं के नाम या तो हटा दिए गए हैं या उन्हें हटाने का खतरा मंडरा रहा है। यह एक बेहद अजीब अनुपात है जो पूरी मतदाता सूची पर सवाल खड़े करता है। अन्य भाजपा शासित राज्यों ने अभी तक उन मतदाताओं की सूची जारी नहीं की है जिनके नाम पर खतरा है। सीईओ का दावा है कि कोई अस्तित्व का संकट नहीं है, लेकिन जब तक मतदाता बीएलओ या ईआरओ की संतुष्टि के लिए पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते, तब तक उनके नाम अंतिम सूची से हटाए जा सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली ने रविवार को स्पष्ट किया था कि SIR के दौरान कुछ मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस का मतलब यह नहीं है कि उनके नाम हटा दिए जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में 14 मई को SIR की घोषणा इस उद्देश्य के साथ की थी कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता सूची में कोई भी पात्र नागरिक छूटे न और कोई अपात्र शामिल न हो।

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