ECINET सिस्टम बीजेपी मुख्यालय से कंट्रोल करने की साजिश, जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के ECINET सिस्टम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। रमेश का दावा है कि इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय से वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत (centralise) किया जा सके। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एक सुरक्षा शोधकर्ता (security researcher) ने 8 जुलाई 2026 को ही ECINET में कई खामियों की ओर चुनाव आयोग का ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि, आयोग ने इनमें से एक चिंता पर 6 अक्टूबर 2026 को प्रतिक्रिया दी, जब वह चारों तरफ से आलोचनाओं और हमलों का सामना कर रहा था। रमेश ने यह भी जिक्र किया कि यह वही शोधकर्ता है जिसने कुछ समय पहले CBSE के आईटी सिस्टम की खामियों को उजागर किया था।
चुनाव आयोग के दावों को बताया 'झूठ'
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग द्वारा ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने के फैसले को 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया। उन्होंने कहा कि आयोग का यह दावा कि ECINET का विकास कानून और संविधान के अनुसार किया गया है, पूरी तरह से झूठ है। रमेश के अनुसार, यदि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मंशा ईमानदार होती, तो इसकी वैधता पर सवाल ही नहीं उठते।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियमों, 1960 का उल्लंघन किया है। रमेश का दावा है कि गोवा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs) की पहुंच को प्रतिबंधित कर उनके फैसलों को ओवररूल किया गया, जबकि कानूनन वोटर लिस्ट पर ERO का ही वैधानिक अधिकार होता है।
जयराम रमेश ने घोषणा की है कि 'INDIA' गठबंधन, आम नागरिक और नागरिक समाज संगठन इस कानून और संविधान के उल्लंघन के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे और जवाबदेही की मांग करेंगे। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी 24 सितंबर 2026 को इस अवैध स्थिति को सुधारने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा था।