CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें, जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के जज के हवाले से साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की एक हालिया टिप्पणी के बाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की प्रक्रिया को 'मनमाना' बताया था। जयराम रमेश का दावा है कि जस्टिस भुइयां की बातों ने चुनाव chief की असलियत पूरी तरह उजागर कर दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रमेश ने लिखा कि हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने जिस तरह से अपनी बात रखी, उससे यह साफ हो गया है कि CEC अब देश के लिए एक 'लायबिलिटी' बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त केवल अवैध आदेशों का पालन कर रहे हैं और यदि उनमें थोड़ी भी शर्म बची है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से हट जाना चाहिए।
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी और राजनीतिक उबाल
दरअसल, हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस भुइयां ने कहा था कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया, जिसके कारण लाखों नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाए और उन्हें अपने ही देश में 'दूसरे दर्जे का नागरिक' बना दिया जाए, वह मौलिक रूप से मनमानी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी प्रक्रिया संविधान के मूल ढांचे पर प्रहार करती है और इसे किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।
इस मामले को लेकर केवल राजनीतिक बयानबाजी ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी विरोध दिख रहा है। हाल ही में इंडियन यूथ कांग्रेस ने रायसीना रोड से जंतर मंतर तक एक विरोध मार्च निकाला। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। चिव ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की उसकी भी कड़ी आलोचना की।
यह पूरा विवाद चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) और पंजीकरण प्रक्रियाओं को लेकर चल रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्ष नहीं है। इसी बीच, एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी मतदाता सूचियों और तकनीकी प्रणालियों के फैसलों पर कई बार आपत्तियां जताई थीं, हालांकि चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थे।