जंतर मंतर को विरोध स्थल से हटाने का फैसला, IYC चीफ ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती

देश की राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा जंतर मंतर अब शायद वैसा न रहे। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल (designated venue) की सूची से हटा दिया है। दिल्ली पुलिस के इस कदम के खिलाफ अब इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिव ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर जंतर मंतर की 'डेजिग्नेटेड वेन्यू' वाली स्थिति को वापस ले लिया। इस फैसले के बाद अब प्रदर्शनकारियों के लिए जंतर मंतर पर जमा होना कानूनी रूप से मुश्किल हो गया है। उदय भानु चिव ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए अदालत में एक नई अर्जी दाखिल की है। गौरतलब है कि चिव की एक याचिका पहले से ही हाई कोर्ट में लंबित है, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनों की अनुमति देने के पुलिस के नियमों पर सवाल उठाए थे।
संविधान और मौलिक अधिकारों का दिया हवाला
अपनी याचिका में उदय भानु चिव ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का जिक्र किया है, जो नागरिकों को भाषण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार देते हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि जंतर मंतर सालों से लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने का एक प्रमुख केंद्र रहा है, और इसे अचानक हटाना इन अधिकारों का उल्लंघन है।
अब सवाल यह उठता है कि अगर जंतर मंतर पर प्रदर्शन नहीं होंगे, तो लोग कहां जाएंगे? दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर के विकल्प के तौर पर तीन अन्य जगहों के नाम सुझाए हैं:
- रामलीला मैदान
- बुरारी ग्राउंड
- पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड
पुलिस का कहना है कि अब प्रदर्शनों के लिए इन्हीं वैकल्पिक स्थलों का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक संगठनों का मानना है कि शहर के बीचों-बीच स्थित जंतर मंतर की अपनी अहमियत है और इसे हटाना विरोध की आवाज को दबाने जैसा है। अब सबकी नजरें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि वह पुलिस के इस आदेश पर क्या रुख अपनाता है।