ITO चौराहा भारी ट्रैफिक जाम से परेशान, क्षमता से अधिक वाहन बने मुसीबत

दिल्ली का आईटीओ चौराहा इन दिनों गंभीर ट्रैफिक जाम से जूझ रहा है। यह चौराहा मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर दिल्ली को नोएडा और गाजियाबाद से जोड़ने वाला एक मुख्य मार्ग है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और एमसीडी के आंकड़ों के मुताबिक, इस चौराहे से रोजाना 4 लाख से 4.5 लाख वाहन गुजरते हैं। पीक आवर्स के दौरान यह संख्या बढ़कर 6 लाख से 7 लाख वाहनों तक पहुंच जाती है, जो कि सिग्नल की क्षमता से काफी अधिक है।
कम्यूटर, जिनमें इशमीत और राजेश जैसे लोग शामिल हैं, बताते हैं कि सिग्नल पर इंतजार का समय अक्सर 6 से 10 मिनट से ज्यादा होता है। कई बार सिग्नल पर लगने वाला यह इंतजार सफर के कुल समय से भी ज्यादा लंबा हो जाता है। अधिकारियों ने इस बार-बार होने वाली देरी का मुख्य कारण 'कंपीटिंग फ्लो' यानी एक दूसरे को काटती ट्रैफिक धाराओं को माना है।
ट्रैफिक जाम की अन्य वजहें
इस समस्या को और बढ़ाने में अचानक वाहन खराब होना, बसों का अचानक रुकना, एम्बुलेंस का आना और बार-बार ट्रैफिक डायवर्जन जैसी बातें शामिल हैं। पीक आवर्स के दौरान इस ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस चौराहे पर मैनुअल निगरानी रखती है।
विशेषज्ञों के सुझाव और समाधान
शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने इस जाम को कम करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें सिंक्रोनाइज्ड सिग्नलिंग सिस्टम लागू करना और वैकल्पिक रास्तों का विकास शामिल है। इसके अलावा, इस जगह पर फ्लाईओवर के निर्माण को लेकर एक व्यापक फिजिबिलिटी स्टडी की भी मांग की जा रही है।
संभावित फायदे
आईटीओ जंक्शन को सिग्नल-फ्री बनाने के लिए एक बड़ा अभियान भी चल रहा है। इस बदलाव से यात्रा के समय में 60 प्रतिशत की कमी और स्थानीय प्रदूषण के स्तर में 40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।