ITO फ्लाईओवर के नीचे बनेगा पब्लिक यूटिलिटी हब, PWD ने तैयार किया प्लान

दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में से एक ITO फ्लाईओवर के नीचे की खाली जगह अब केवल धूल और गंदगी का केंद्र नहीं रहेगी। दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस खाली जगह को एक मल्टी-फंक्शनल पब्लिक यूटिलिटी हब में बदलने की योजना बनाई है। इस पहल का मकसद शहर की खूबसूरती बढ़ाना और खाली पड़ी जगहों का सही इस्तेमाल करना है ताकि वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा या अवैध कूड़ा फेंकने जैसी समस्याएं खत्म हो सकें।
PWD द्वारा तैयार किए गए इस नए डिजाइन में कई आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया गया है। इस हब में आम जनता के लिए एक कैफेटेरिया और पार्किंग की सुविधा होगी। साथ ही, यहां PWD का एक कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा, जिसमें 40 से 50 कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, प्रोजेक्ट में विभिन्न कॉन्फ्रेंस रूम और केबिन भी शामिल हैं। डिजाइन में लैंडस्केपिंग, रैंप और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स का खास ख्याल रखा गया है, जिसके लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
50 फ्लाईओवरों का बदलेगा स्वरूप
यह प्रोजेक्ट दिल्ली सरकार की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है, जिसके तहत राजधानी के करीब 50 फ्लाईओवरों के नीचे की उपेक्षित जगहों को उत्पादक सार्वजनिक संपत्तियों में बदला जाएगा। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिल्ली सरकार ने दो निजी संगठनों के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन साझेदारियों का मुख्य उद्देश्य शहर के सौंदर्य को बढ़ाना, हरियाली लाना और सुरक्षा व स्वच्छता को प्राथमिकता देना है।
इस योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी, जब PWD के विशेष सचिव शशांक आला ने जिला मजिस्ट्रेटों को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) के साथ मिलकर लाइब्रेरी, चार्जिंग स्टेशन और खेल के मैदान जैसी सुविधाओं की पहचान करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान में दीपाली और मंगोलपुरी मार्केट के बीच 2.5 किलोमीटर के हिस्से में डिक्सन टेक्नोलॉजीज और वृक्षित फाउंडेशन के साथ मिलकर काम चल रहा है, जहां फेंसिंग, ग्रीन स्पेस और दीवारों पर सुंदर म्यूरल्स बनाए जा रहे हैं।
बता दें कि इन सभी प्रोजेक्ट्स की निगरानी दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन (DUAC) और UTTIPEC द्वारा की जाएगी, ताकि मास्टर प्लान दिल्ली-2021 के नियमों का पालन हो सके। इसके साथ ही सरकार ने ITO जंक्शन सहित 156 किलोमीटर की सड़कों का फिजिबिलिटी सर्वे भी शुरू किया है, जिसके तहत 18 नए फ्लाईओवर और एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी है।