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जंतर-मंतर CJP प्रदर्शन हिंसा: घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने तोड़ी चुप्पी, जानिए क्या कहा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों ने घटना के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। 30 जुलाई 2026 को, इंस्पेक्टर नंद किशोर की बेटी ने प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे का समर्थन किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों पर हुई हिंसा की कड़ी निंदा की। इसके अलावा, सब-इंस्पेक्टर अशोक मीना के परिवार ने भी कहा कि अपनी ड्यूटी निभा रहे पुलिसकर्मियों पर हमला करना किसी भी हाल में सही नहीं है।
CJP प्रदर्शन में हिंसा और घायलों के आंकड़े
यह CJP प्रदर्शन 20 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था, जिसमें भारी हंगामा देखने को मिला। इस हिंसा में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर के पास फिर से हिंसा भड़क गई, जिसमें एक असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) के सिर में चोट लग गई और एक अन्य पुलिस इंस्पेक्टर को चाकू मार दिया गया। दिल्ली पुलिस ने पहले ही बताया था कि प्रदर्शनकारियों ने BNS की धारा 163 के तहत लगे आदेशों का उल्लंघन किया था। इसके बाद CJP ने 25 जुलाई 2026 को अपना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया और दावा किया कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं, जिसमें FIR वापस लेना, मुआवजा देना और प्रस्तावित एजुकेशन रिफॉर्म्स की स्टडी करना शामिल है।
FIR, सुप्रीम कोर्ट का रुख और पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे मामले से जुड़े अन्य घटनाक्रम में 30 जुलाई 2026 को CJP प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाने वाली एक महिला के खिलाफ FIR दर्ज की गई। दिल्ली पुलिस ने यह भी साफ किया कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए अभी भी एक एक्टिव और अधिकृत जगह है, और इसके बंद होने की अफवाहें गलत हैं। इससे पहले, 28 जुलाई 2026 को घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने बेहतर सुरक्षा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जबकि दिल्ली पुलिस फेडरेशन ने अपने घायल साथियों के समर्थन में 31 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की योजना का ऐलान किया था। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से की गई जांच में CJP प्रदर्शनकारियों के बीच 2,873 ऐसे लोग पहचाने गए हैं जिनका पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है।