पुराना किला में इंद्रप्रस्थ नृत्य महोत्सव का समापन, शास्त्रीय नृत्यों ने बांधा समां

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक पुराने किले में आयोजित इंद्रप्रस्थ नृत्य महोत्सव का रविवार को शानदार समापन हो गया। दिल्ली पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय उत्सव में भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। "विकास भी, विरासत भी" की थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के 150 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस महोत्सव में कुचिपुड़ी, ओडिसी, भरतनाट्यम, कथक, सत्त्रिया, मोहिनीअट्टम, कथकली और मणिपुरी जैसे शास्त्रीय नृत्यों का प्रदर्शन किया गया। खास बात यह रही कि नृत्य प्रस्तुतियों के साथ-साथ एक लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया गया, जिसने इंद्रप्रस्थ के गौरवशाली इतिहास और यमुना नदी के महत्व को जीवंत कर दिया। आम जनता के लिए यह आयोजन पूरी तरह निशुल्क था, जिससे बड़ी संख्या में लोग इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बने।
दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी और भविष्य की योजनाएं
महोत्सव में पद्म भूषण से सम्मानित गुरु राजा और राधा रेड्डी, पद्म श्री रामली इब्राहिम, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता गुरु वासवती मिश्रा और गुरु वैभव अरेकर जैसे दिग्गजों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। समापन समारोह के लिए गुरु वैभव अरेकर ने एक विशेष भरतनाट्यम प्रस्तुति तैयार की थी। इस आयोजन में नाट्य तरंगिणी, सूत्र फाउंडेशन और कलाक्षेत्र फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का भी अहम योगदान रहा।
दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि यह दूसरा ऐसा अवसर था जब इस महोत्सव का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की विरासत और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने के लिए यह एक बेहतरीन मंच है। सरकार अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ विचार-विमर्श कर इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शहर के कैलेंडर का नियमित हिस्सा बनाने की योजना बना रही है, ताकि दिल्ली को एक बड़े सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTDTC) के एमडी और सीईओ सुनील अंचिपाका ने कहा कि पुराने किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और शास्त्रीय नृत्य के जीवंत रंगों के मेल ने लोगों में अपनी कला के प्रति रुचि और सम्मान को और बढ़ाया है।