नई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2026 शुरू, विज्ञान और समुद्री सहयोग पर जोर
भारतीय नौसेना ने नई दिल्ली में IPRD-2026 की शुरुआत की, जिसमें विज्ञान और समुद्री सहयोग पर चर्चा होगी।

भारतीय नौसेना ने मंगलवार को नई दिल्ली में अपने वार्षिक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संवाद, इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2026 (IPRD-2026) का आगाज किया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (NMF) के साथ मिलकर आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 'इंडो-पैसिफिक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग' की थीम पर आधारित है।
सम्मेलन के पहले दिन विशेषज्ञों और भागीदार देशों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे वैज्ञानिक प्रगति और संस्थागत साझेदारियों को व्यावहारिक क्षेत्रीय सहयोग में बदला जा सकता है। कार्यक्रम की शुरुआत नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष और पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (रिटायर्ड) के उद्घाटन भाषण से हुई, जिसके बाद नेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (रिटायर्ड) ने विशेष संबोधन दिया।
अकादमिक नेटवर्क और समुद्री सुरक्षा पर मंथन
पहले सत्र में 'अकादमिक नेटवर्क, अनुसंधान और मानव पूंजी विकास' पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। चर्चा में हिंद महासागर के तटीय शहरों के विश्वविद्यालयों के बीच एक व्यापक नेटवर्क बनाने और थिंक टैंकों, सरकारों व विश्वविद्यालयों के बीच आपसी तालमेल मजबूत करने की संभावनाओं को तलाशा गया। इसी सत्र के अंत में 'सी ब्लाइंडनेस एंड मैरीटाइम हेरिटेज इन इंडिया' नामक एक मोनोग्राफ भी जारी किया गया।
दूसरे सत्र में 'मैरीटाइम सिचुएशनल अवेयरनेस और क्रिटिकल मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर के संरक्षण' जैसे गंभीर विषयों पर बात हुई। इसमें समुद्री व्यापार की सुरक्षा, पानी के नीचे के बुनियादी ढांचे की रक्षा और सूचना साझा करने की जरूरतों पर चर्चा की गई। इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPMDA) से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर भी विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।
कार्यक्रम के दौरान 'सहयोग का संवाद' नामक एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन, फिलीपींस के राजदूत जोसेल एफ इग्नासियो और नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने हिस्सा लिया। इस पूरी कवायद का मकसद जलवायु जोखिमों से निपटने, समुद्री ज्ञान तक पहुंच बढ़ाने और तकनीकी साझेदारी के जरिए क्षेत्रीय लचीलेपन को मजबूत करना है।