भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 'जब तक पूरा न हो जाए, तब तक खत्म नहीं होता', बोले एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर बात की और कहा कि जब तक काम पूरा न हो जाए, तब तक वह खत्म नहीं माना जाता।

Kittu Kumari22 October 20262 min read0 viewsNational
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 'जब तक पूरा न हो जाए, तब तक खत्म नहीं होता', बोले एस जयशंकर

भारत और अमेरिका के बीच होने वाला बहुप्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस पर एक संतुलित रुख अपनाया है। नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के दौरान जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हालांकि दोनों देश समझौते के बहुत करीब हैं, लेकिन कूटनीति में आखिरी कदम सबसे चुनौतीपूर्ण होते हैं। उन्होंने मजाकिया और गंभीर लहजे में कहा, "देखिए, जब तक काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक वह खत्म नहीं माना जाता।"

विदेश मंत्री ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दोनों ने संकेत दिए हैं कि यह डील अब अंतिम दौर में है। हालांकि, जयशंकर ने यह भी कहा कि अक्सर आखिरी मील या उससे ठीक पहले के चरणों में कुछ चुनौतियां सामने आती हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए बातचीत करने वाली टीमें अभी काम कर रही हैं। जब उनसे इन चुनौतियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विनम्रता से इनकार करते हुए कहा कि यह बातचीत करने वाली टीमों का काम है कि वे इन्हें सुलझाएं।

ऊर्जा सुरक्षा और विविधीकरण पर जोर

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इस चर्चा के दौरान एस जयशंकर ने वैश्विक अस्थिरता के बीच 'विविधीकरण' (Diversification) की जरूरत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया इतनी अनिश्चित हो चुकी है कि कोई भी देश व्यापार, ऊर्जा या भू-राजनीति में स्थिरता को हल्के में नहीं ले सकता। उन्होंने इसकी तुलना पोर्टफोलियो मैनेजमेंट से करते हुए कहा कि जिस तरह बाजार की अस्थिरता में निवेश को अलग-अलग जगहों पर बांटा जाता है, वैसे ही सरकारों और व्यवसायों को भी किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय अपने विकल्पों को बढ़ाना चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने भारत को पेट्रोलियम रिफाइनिंग के मामले में एक 'सुपरपावर' बताया। रूबियो ने जामनगर रिफाइनरी का दौरा भी किया और भारत को वेनेजुएला के कच्चे तेल की प्रोसेसिंग बढ़ाने का सुझाव दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और कहा है कि यह डील "काफी करीब" है।

दोनों देश पिछले एक साल से अधिक समय से इस द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य टैरिफ, कृषि उत्पादों, औद्योगिक वस्तुओं और नियामक बाधाओं जैसे पुराने विवादों को सुलझाते हुए बाजार तक पहुंच को बढ़ाना है। रूबियो और जयशंकर की मुलाकात में व्यापार के अलावा रक्षा, तकनीक और नागरिक परमाणु सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई, ताकि दोनों देशों की सुरक्षा और समृद्धि को सुनिश्चित किया जा सके।

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