दुर्लभ बीमारियों के इलाज में मिलेगी बड़ी मदद, भारत और ब्रिटेन ने दिल्ली में खोला जीनोमिक्स सेंटर

Kittu Kumari14 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दुर्लभ बीमारियों के इलाज में मिलेगी बड़ी मदद, भारत और ब्रिटेन ने दिल्ली में खोला जीनोमिक्स सेंटर

भारत और ब्रिटेन ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी साझेदारी की है। दिल्ली में 'BRIC-CDFD, ONT इंडिया जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की शुरुआत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के निदान और सटीक इलाज (Precision Medicine) में क्रांति लाना है। इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और ब्रिटेन के व्यापार, नवाचार, विज्ञान और व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने 12 अक्टूबर 2026 को किया।

यह केंद्र हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (CDFD) और ब्रिटेन की कंपनी ऑक्सफोर्ड नैनोपोर टेक्नोलॉजीज के बीच एक साझा प्रयास है। इस पहल का उद्देश्य अत्याधुनिक नैनोपोर सीक्वेंसिंग तकनीक का उपयोग करना है, जो डीएनए और आरएनए का रीयल-टाइम विश्लेषण करने में सक्षम है। यह तकनीक जटिल जीनोम की जांच और दुर्लभ रोगों की पहचान के लिए बेहद कारगर मानी जाती है।

इन गंभीर बीमारियों पर रहेगा मुख्य फोकस

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इस नए रिसर्च हब में केवल दुर्लभ बीमारियों ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों पर भी काम किया जाएगा। केंद्र के मुख्य शोध क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • कैंसर जीनोमिक्स और ओरल कैंसर का अध्ययन।
  • संक्रामक रोगों की निगरानी (Infectious Disease Surveillance)।
  • नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग (Newborn Screening)।
  • स्थानीय शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास।

भारत में दुर्लभ आनुवंशिक विकारों का बोझ काफी अधिक है। अनुमानों के मुताबिक, देश में लगभग 7 करोड़ लोग इन स्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं। एक अध्ययन में 3,000 से अधिक मरीजों की जांच के दौरान 305 अलग-अलग दुर्लभ बीमारियों की पहचान की गई, जिनमें न्यूरोडेवलपमेंटल और मेटाबॉलिक विकार सबसे ज्यादा पाए गए।

यह केंद्र 'इंडिया-यूके विजन 2035' और रिसर्च एंड इनोवेशन एमओयू के व्यापक ढांचे के तहत स्थापित किया गया है। गौरतलब है कि 2008 के बाद से ब्रिटेन और भारत ने मिलकर 290 से अधिक परियोजनाओं में 450 मिलियन पाउंड से अधिक का निवेश किया है। यह नया सेंटर दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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