भारत ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली घोषणापत्र पर आम सहमति हासिल की

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त घोषणापत्र पर आम सहमति बन गई है। यह भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता है क्योंकि भारत 11 सदस्यों वाले इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। रॉयटर, इंडिया टुडे, आउटलुक और बिजनेसवर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, रात भर चली लंबी बैठकों के बाद शनिवार सुबह तक इस दस्तावेज को अंतिम रूप दिया गया। इस दस्तावेज में किसी भी देश का नाम लिए बिना एकतरफा बल प्रयोग की निंदा किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
भारत ने 1 जनवरी 2026 को इस संगठन की अध्यक्षता संभाली थी। इस समूह में अब 11 देश शामिल हैं जिनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी और 40 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर असहमति थी, लेकिन भारत ने बिना किसी देश का नाम लिए एकतरफा बल प्रयोग की सामान्य निंदा वाला रास्ता चुना ताकि सभी देशों में सहमति बन सके।
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में कई द्विपक्षीय बैठकें हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की और बातचीत से पश्चिम एशिया संकट हल करने की बात कही। इसके अलावा, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन अल नाहयान ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन में शामिल हुए। रूस के साथ 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर चर्चा हुई।
इस शिखर सम्मेलन का एजेंडा कूटनीतिक तनाव से आगे बढ़कर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आपदा लचीलापन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों पर भी केंद्रित है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग पर जोर दिया है। शिखर सम्मेलन के समाप्त होने के बाद चीन इस समूह की अगली अध्यक्षता संभालेगा। रविवार को आधिकारिक रूप से दिल्ली घोषणापत्र जारी होने का इंतजार किया जा रहा है।