RE: DIALOGUES 2026: विकसित भारत के लिए बिजली बुनियादी ढांचे की चुनौतियों पर मंथन

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsNational
RE: DIALOGUES 2026: विकसित भारत के लिए बिजली बुनियादी ढांचे की चुनौतियों पर मंथन

भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को पूरा करने के लिए केवल बिजली पैदा करना काफी नहीं है, बल्कि उसे सही ढंग से वितरित करना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी जरूरी है। इसी गंभीर विषय पर नई दिल्ली में 14 अक्टूबर, 2026 को 'RE: DIALOGUES 2026' का आयोजन किया गया। 'पावरिंग अ डेवलप्ड इंडिया' थीम पर आधारित इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत की बढ़ती बिजली मांग और उसे पूरा करने के लिए जरूरी निवेश व इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच के अंतर को पाटना था।

इस कार्यक्रम का आयोजन पॉलिसी पर्सपेक्टिव्स फाउंडेशन (PPF) और ऑरेंज सर्कल एनर्जी (OCE) द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री भूपिंदर भल्ला शामिल हुए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का ऊर्जा संक्रमण राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाकर होना चाहिए। भल्ला ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, तकनीकी प्रगति और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई, ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

बिजली वितरण और ग्रिड स्थिरता की बड़ी चुनौतियां

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सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया कि क्या वर्तमान योजनाएं भारत की विकसित अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षाओं के लिए पर्याप्त हैं। PPF के अध्यक्ष प्रद्योत चंद्र हलदर ने स्पष्ट किया कि केवल क्षमता बढ़ाना समाधान नहीं है; इसके लिए डिमांड फोरकास्टिंग, स्टोरेज और ग्रिड स्थिरता में सुधार करना बेहद जरूरी है। चर्चा के दौरान चार मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया: बिजली की मांग, बुनियादी ढांचा, नियामक स्थिरता और उत्पादन का अर्थशास्त्र।

ऑरेंज सर्कल एनर्जी के संस्थापक निकेश सिन्हा ने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में आने वाली बाधाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राइट-ऑफ-वे क्लीयरेंस, ट्रांसफार्मरों की उपलब्धता और बिजली उत्पादन केंद्रों से मांग केंद्रों के बीच की लंबी दूरी जैसी समस्याएं बड़ी बाधा बनी हुई हैं। वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व सलाहकार सफ़ी अहसन रिज़वी ने सुझाव दिया कि यदि सार्वजनिक संसाधनों को रणनीतिक रूप से नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा लचीलेपन की ओर मोड़ा जाए, तो बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित किया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में सरकार, वित्त, तकनीक और शोध क्षेत्र के दिग्गजों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने मिलकर एक ऐसी ऊर्जा प्रणाली बनाने पर विचार-विमर्श किया जो भविष्य की विकसित अर्थव्यवस्था का बोझ उठाने में सक्षम हो।

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