India Mobile Congress 2026: खेती में AI और 5G ऑटोमेशन पर रहा जोर, ग्रामीण कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 का दसवां संस्करण शनिवार को संपन्न हो गया। 'स्केल विदाउट बाउंड्रीज' थीम पर आधारित इस चार दिवसीय आयोजन में इस बात पर खास जोर दिया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को खेती-किसानी से जोड़ा जाए, 5G नेटवर्क के लिए ऑटोनॉमस AI एजेंट विकसित किए जाएं और देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाई जाए। इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य वैश्विक दूरसंचार मानकों में भारत की स्थिति को और मजबूत करना था।
समापन के दिन इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के सहयोग से 'ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन AI फॉर एग्री-फूड सिस्टम्स' बैठक का आयोजन किया गया। इसके साथ ही 'रोबोटिक्स फॉर गुड यूथ चैलेंज इंडिया' और 'ITU बिल्ड-ए-थॉन' जैसे कार्यक्रम भी हुए, जहां इंजीनियरों ने 5G नेटवर्क ऑर्केस्ट्रेशन के लिए स्वायत्त AI एजेंट तैयार किए। चर्चा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड विस्तार के लिए टिकाऊ वित्तपोषण और उस बुनियादी ढांचे पर बात हुई, जिससे हाई-स्पीड इंटरनेट का लाभ सीधे जमीनी स्तर पर आर्थिक फायदे में बदल सके।
किसानों की समस्याओं का समाधान बनेगा AI
ITU के टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बिलेल जमूसी ने कहा कि कृषि AI का ध्यान केवल तकनीकी बारीकियों पर नहीं, बल्कि किसानों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक समस्याओं को हल करने पर होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI समाधान किसानों के साथ मिलकर विकसित किए जाएं ताकि सफल पायलट प्रोजेक्ट्स को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।
वहीं, दूरसंचार विभाग के टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर के सीनियर डिप्टी डायरेक्टर जनरल सैयद तौसीफ अब्बास ने स्पष्ट किया कि कृषि AI की सफलता का पैमाना किसानों की आजीविका में सुधार, उत्पादकता में वृद्धि, सप्लाई चेन की दक्षता और खाद्य सुरक्षा होगी। उन्होंने कहा कि ये समाधान पारदर्शी, समावेशी और सुलभ होने चाहिए, जिसमें डेटा की गुणवत्ता और छोटे किसानों की जरूरतों का ख्याल रखा जाए। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के देबाशीष महालिक ने भी डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी के लिए मजबूत ढांचे की आवश्यकता बताई।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के सीईओ रामकृष्ण पी ने कहा कि यह संस्करण तकनीक के केवल उपयोग से आगे बढ़कर स्वदेशी समाधान विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों में योगदान देने की भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी बौद्धिक संपदा और सॉवरेन सेमीकंडक्टर्स पर जोर दिया है, जबकि संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने वैश्विक 6G पेटेंट में 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल करने के भारत के लक्ष्य को रेखांकित किया है।