भारत ने सफलतापूर्वक किया 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन, नई दिल्ली घोषणापत्र हुआ मंजूर

भारत ने 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की। इस सम्मेलन में 140 सूत्रीय नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में बताया कि अंतिम मसौदे पर किसी भी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई है। इस व्यापक दस्तावेज ने पश्चिम एशिया के चल रहे संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के महत्वपूर्ण राजनयिक मतभेदों को सुलझाया।
राजनयिक बातचीत और आतंकवाद पर रुख
Reuters की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, यह आम सहमति व्यापक बैक-चैनल वार्ताओं के माध्यम से बनी। वार्ताओं में अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा निर्बाध व्यापार और ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखने की मांग करने वाली विशिष्ट भाषा तैयार की गई। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इसमें आतंकवाद को किसी भी प्रेरणा के बावजूद अनुचित माना गया और सीमा पार आवाजाही तथा वित्तपोषण के संबंध में दोहरे मापदंडों को खारिज किया गया। सदस्यों ने वैश्विक वास्तुकला पर भी चर्चा की, जिसमें चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया。
आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय बैठकें
The Hindu और Hindustan Times की रिपोर्टों के अनुसार, आर्थिक सहयोग पूरे कार्यक्रम के दौरान एक प्राथमिक फोकस रहा। घोषणापत्र में व्यापार को विकृत करने वाले एकतरफा टैरिफ पर गहरी चिंता व्यक्त की गई, जबकि भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में किसी एक ब्रिक्स मुद्रा की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर के इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक घंटे लंबी बैठक की। सात वर्षों में चीनी नेता की भारत की यह पहली यात्रा थी। दोनों नेताओं ने राजनीतिक दृष्टिकोण से सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई। राष्ट्रपति शी ने घोषणा की कि चीन 2027 के कार्यकाल के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।
भविष्य की चुनौतियां और कार्यान्वयन
CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, 13 सितंबर को आउटरीच और ब्रिक्स प्लस सत्रों के साथ शिखर सम्मेलन जारी रहा। नेता भुगतान प्रणालियों और महत्वपूर्ण-खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के संबंध में इन घोषणाओं को परिचालन वास्तविकता में बदलने पर केंद्रित रहे। पश्चिम एशिया में सैन्य विकास पर अधिकतम संयम का आह्वान क्या प्रभाव डालेगा, यह बाजारों के लिए एक खुला प्रश्न बना हुआ है। आतंकवाद विरोधी कार्य समूह के निर्णयों का कार्यान्वयन ब्लॉक की एकता के लिए अगली वास्तविक परीक्षा के रूप में काम करेगा।