भारत-जर्मनी ऊर्जा सहयोग के 20 साल पूरे, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर चर्चा
नई दिल्ली में भारत-जर्मनी ऊर्जा फोरम (IGEF) ने अपने 20 साल पूरे किए। ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी पर दोनों देशों ने जोर दिया।

भारत और जर्मनी के बीच ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी के 20 साल पूरे हो गए हैं। इस खास मौके पर नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहां भारत-जर्मनी ऊर्जा सहयोग की उपलब्धियों को याद किया गया और भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा हुई। "इंडो-जर्मन एनर्जी फोरम (IGEF) – अतीत से वर्तमान तक का सफर और भविष्य के लिए उम्मीदें" थीम के तहत आयोजित इस शाम में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के दिग्गज और पुराने सहयोगी शामिल हुए।
बता दें कि IGEF की शुरुआत साल 2006 में तत्कालीन जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा हनोवर ट्रेड फेयर के दौरान की गई थी। यह फोरम जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय (BMWE) और भारत के विद्युत मंत्रालय (MoP) द्वारा संचालित किया जाता है। इस मंच का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा प्राथमिकताओं पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है।
ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा साझेदारी का नया केंद्र
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अब यह साझेदारी 'ग्रीन हाइड्रोजन' के अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है। जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय के गुंथर ग्राथवोल ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन अब इस फोरम के लिए अगली बड़ी सीमा है। उन्होंने कहा कि रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स को एक समान बनाकर और निवेश के जोखिमों को कम करके भारत और जर्मनी बड़े पैमाने पर टिकाऊ ऊर्जा व्यापार का ढांचा तैयार कर रहे हैं।
जर्मन राजदूत जैस्पर विक ने इस साझेदारी को एक 'सक्सेस स्टोरी' बताया। उन्होंने कहा कि IGEF ने न केवल भारत के पावर प्लांट्स में रिन्यूएबल एनर्जी को जोड़ने और बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने में मदद की, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार किया है।
इस अवसर पर एक खास चर्चा सत्र "20 साल, 20 मिनट" भी आयोजित किया गया, जिसमें उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। चर्चा में यह बात सामने आई कि कैसे यह सहयोग शुरुआती सॉफ्टवेयर पायलट प्रोजेक्ट्स से शुरू होकर अब राष्ट्रीय नीतियों को आकार देने तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भविष्य में बौद्धिक संपदा (IP) साझा करने के ढांचे और घरेलू परीक्षण बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देनी होगी ताकि दोनों देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।
गौरतलब है कि हाल ही में 25 अक्टूबर 2024 को दोनों सरकारों ने 'इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप' भी लॉन्च किया है, जिसे IGEF के सहयोग से तैयार किया गया था। यह रोडमैप आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।