रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' मेगा रैली, CEC के इस्तीफे की मांग
INDIA गठबंधन ने रामलीला मैदान में बड़ी रैली कर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला और CEC के इस्तीफे की मांग की।

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली के जरिए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस बड़ी रैली में गठबंधन के तमाम दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया और चुनावी गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की औपचारिक मांग की।
रैली को संबोधित करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद करीब 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। राहुल गांधी ने इस स्थिति को 'देशद्रोह' करार देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न केवल पद से हटाया जाएगा, बल्कि उन्हें जेल भी भेजा जाएगा। वहीं, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव ने इस आंदोलन को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए 'दूसरा स्वतंत्रता संग्राम' बताया।
विपक्ष के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार
इस महामोहिम में मल्लिकार्जुन खड़गे, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला जैसे बड़े नेताओं ने भी अपनी बात रखी और चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) पर सवाल उठाए। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरी रैली को 'फ्लॉप' करार देते हुए खारिज कर दिया। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष के पास कोई जनादेश नहीं है और वह केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने इस रैली की अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी थी, जिसमें कार्यक्रम को शांतिपूर्ण रखने और शाम 5 बजे तक समाप्त करने की शर्त शामिल थी। भीड़ को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बहादुर शाह जफर मार्ग, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, मिंटो रोड और अजमेरी गेट जैसे इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया था, जिससे दोपहर तक केंद्रीय दिल्ली में बसों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान का इतिहास 175 साल पुराना है। 1850 के दशक में मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने यहाँ रामलीला की शुरुआत की थी। यह मैदान केवल सांस्कृतिक केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति का गवाह भी रहा है, जहाँ 1975 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में आपातकाल विरोधी प्रदर्शन और 2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुआ था।