CEC ज्ञानेश कुमार का 'सार्वजनिक महाभियोग' करेगा INDIA गठबंधन, दिल्ली में जुटेगा विपक्ष

विपक्षी INDIA गठबंधन दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग चलाएगा। जानें क्या है पूरा मामला और विरोध की वजह।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
CEC ज्ञानेश कुमार का 'सार्वजनिक महाभियोग' करेगा INDIA गठबंधन, दिल्ली में जुटेगा विपक्ष

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक 'सार्वजनिक महाभियोग' (Public Impeachment) आयोजित करने जा रहे हैं। यह पूरा आयोजन एक मॉक पार्लियामेंट्री सेशन की तरह होगा, जिसके जरिए विपक्ष CEC के इस्तीफे की मांग को औपचारिक रूप देना चाहता है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि 'सार्वजनिक महाभियोग' शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया है ताकि विपक्ष का कड़ा रुख साफ हो सके, लेकिन साथ ही यह ध्यान रखा गया है कि यह विधायिका का मजाक न लगे। इस पूरे कार्यक्रम की कमान प्रियंका गांधी संभाल रही हैं। पहले यह आयोजन अशोक होटल में होना था, लेकिन वहां अनुमति न मिलने के कारण अब इसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 10 राजजी मार्ग स्थित आवास पर किया जाएगा।

विपक्ष की रणनीति और कार्यक्रम की रूपरेखा

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यह प्रतीकात्मक सत्र दोपहर 3:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलेगा, जिसमें INDIA गठबंधन के सभी दलों के एक-एक प्रतिनिधि और नागरिक समाज के लोग शामिल होंगे। उम्मीद है कि इसमें करीब 150 से 200 विपक्षी सांसद हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम की खास बातें इस प्रकार हैं:

  • अध्यक्षता: पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इस पूरी कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगी।
  • प्रस्ताव: मल्लिकार्जुन खड़गे खुद महाभियोग का प्रस्ताव पेश करेंगे।
  • संबोधन: कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे।
  • लाइव प्रसारण: इस पूरे घटनाक्रम को दुनिया के सामने लाने के लिए मल्टी-कैमरा सेटअप लगाया गया है, जिससे इसकी लाइव ब्रॉडकास्ट की जाएगी।

विपक्ष की इस नाराजगी की मुख्य वजह वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताएं और विवादित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट रूप से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को रद्द करने और दोबारा पेपर बैलेट वोटिंग शुरू करने की मांग की है।

हालांकि, कानूनी तौर पर CEC को हटाना इतना आसान नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत केवल 'सिद्ध कदाचार या अक्षमता' के आधार पर ही उन्हें हटाया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा के 100 या राज्यसभा के 50 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव जरूरी होता है, जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के जज और अन्य विशेषज्ञों की कमेटी करती है। अंत में संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत और राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य होती है।

विपक्ष का यह प्रतीकात्मक विरोध दरअसल 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली 'Save Democracy' रैली की तैयारी का एक हिस्सा माना जा रहा है।

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