वोटर लिस्ट रिवीजन पर INDIA गठबंधन की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी, चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा

देश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (मतदाता सूची संशोधन) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई दिग्गज नेताओं ने इस याचिका के जरिए वोटर लिस्ट में हो रहे बदलावों पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
विपक्षी दलों का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए एकतरफा फैसलों के कारण बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम गलत तरीके से काटे जा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और इस पूरी रिवीजन एक्सरसाइज को तुरंत रोकने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया का एक स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज द्वारा किया गया एक पैनल करे।
पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए 10 बड़ी मांगें
INDIA गठबंधन ने अपनी याचिका में कोर्ट से 10 विशिष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- 24 जून 2025 को लिए गए फैसले से जुड़े चुनाव आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड, एजेंडा और मीटिंग मिनट्स को सार्वजनिक किया जाए।
- नाम हटाए गए मतदाताओं की बूथ-वार सूची प्रकाशित की जाए और साथ ही नाम हटाने के कारणों और जनसांख्यिकीय विवरण का खुलासा हो।
- किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित नोटिस दिया जाए और सुनवाई का मौका मिले।
- भविष्य के सभी फैसलों में 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 18 का सख्ती से पालन हो।
हालांकि, इस कानूनी लड़ाई में फिलहाल एक तकनीकी अड़चन सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियात्मक खामियां पाई हैं। इनमें 220 रुपये की कोर्ट फीस की कमी, नौ याचिकाकर्ताओं के बिना हस्ताक्षर वाले वकालतनामा और मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्टता जैसी समस्याएं शामिल हैं। जब तक ये कमियां दूर नहीं होतीं, कोर्ट इस मामले पर सुनवाई की तारीख तय नहीं करेगा।
दूसरी ओर, दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी माहौल तनावपूर्ण है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक आदेश जारी कर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में 'डी-नोटिफाई' कर दिया है। अब प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड या CBD ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थानों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने विपक्षी नेताओं की प्रशासनिक बैठक की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि शक्तियां अलग-अलग हैं और मामला अभी विचाराधीन (sub judice) है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक रास्ता सभी नागरिकों के लिए खुला है।