रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की हुंकार, CEC के इस्तीफे और चुनावी सुधारों की मांग
इंडिया गठबंधन ने रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली की, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी सुधारों की मांग उठाई।

देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने एक विशाल रैली आयोजित की। 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ निकली इस रैली में विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू हुए इस मार्च के बाद नेताओं ने रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया, जहां मुख्य मुद्दा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा रहा।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और महाराष्ट्र, बिहार व उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों पर 'वोट चोरी' के जरिए सत्ता हथियाने का आरोप लगाया। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान नेतृत्व जनता द्वारा चुना नहीं गया, बल्कि खुद को चुन रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण दे रहे हैं, जिन्हें दलितों, युवाओं और महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने के एक औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
EVM और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रैली के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और मतदाता सूची में हेरफेर का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि वोट चोरी के कारण राज्य विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव प्रभावित हुए हैं। राहुल गांधी ने कड़े शब्दों में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को न केवल पद छोड़ना होगा, बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अंततः पीएम मोदी और अमित शाह को कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।
इस रैली में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। गठबंधन ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को रद्द करना।
- मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया को रोकना।
- पुनः पेपर बैलेट (कागजी मतपत्रों) की प्रणाली को लागू करना।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस प्रदर्शन पर तंज कसते हुए इसे 'सुपर फ्लॉप' करार दिया। भाजपा का दावा है कि रैली में भीड़ उम्मीद से काफी कम रही। सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 10,000 जवानों को तैनात किया गया था, ताकि भीड़ और ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित रखा जा सके।