"क्या सबको जेल में डाल देंगे?" चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरे विपक्षी सांसद

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकालने की तैयारी में जुटे INDIA गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।
सीपीआई(एम) नेता जॉन ब्रिटस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और उनके प्रशासन ने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों और मतदाताओं को हटाने के मुद्दे पर देश को गुमराह किया है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब CEC के पास अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा है। ब्रिटस ने चेतावनी भरे लहजे में पूछा, "वे कितने समय तक नागरिकों, सांसदों और कार्यकर्ताओं को रोक सकते हैं? क्या वे हम सबको जेल में डाल देंगे? क्या भारत की सभी जेलों में उन लोगों को रखने की जगह है जो विरोध कर रहे हैं?"
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और 'लोकतंत्र की हत्या' के आरोप
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने चुनाव आयोग पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद होते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। ईडन के मुताबिक, धर्म और जाति के आधार पर मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त केवल सरकार और सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने इस मुद्दे को भारतीय राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा धोखा करार दिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 13 करोड़ वोटों को लिस्ट से हटा दिया गया है, जो सीधे तौर पर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन है। गांधी ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताते हुए कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है और वे इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
विपक्षी सांसदों का यह विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्होंने देश के कोने-कोने में इस मुद्दे को उठाने और चुनाव प्रणाली में सुधार की मांग करने का संकल्प लिया है।