इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन से दिल्ली में भारी जाम, चुनाव आयोग के खिलाफ उतरे दिग्गज

Kittu Kumari6 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन से दिल्ली में भारी जाम, चुनाव आयोग के खिलाफ उतरे दिग्गज

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) ने चुनाव आयोग की मांगों को लेकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के कारण मध्य दिल्ली के इलाकों में ट्रैफिक पूरी तरह चरमरा गया और आम जनता को घंटों जाम का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस प्रदर्शन को और अधिक प्रभावी बना दिया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य निशाना निर्वाचन सदन स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का मुख्यालय था। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। इसी के विरोध में वे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता पंजीकरण फॉर्म में बदलाव और सीईसी के खिलाफ याचिकाओं पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ट्रैफिक की चुनौती

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प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने सुरक्षा का घेरा बेहद सख्त कर दिया था। विजय चौक, संसद भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास हजारों पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियां तैनात की गईं। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस प्रदर्शन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके चलते इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई।

  • ट्रैफिक का हाल: सुबह 8 बजे से ही ट्रैफिक पुलिस ने प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया था, जिससे दिल्ली-नोएडा कॉरिडोर समेत कई मुख्य रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
  • प्रशासन की अपील: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से दिल्ली मेट्रो का उपयोग करने और प्रभावित रास्तों से बचने की अपील की।
  • चुनाव आयोग का रुख: आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग के भीतर कोई मतभेद नहीं है।

बता दें कि 2 अक्टूबर से ही जंतर मंतर पर हुए पिछले प्रदर्शनों के कारण नई दिल्ली जिले में सुरक्षा प्रोटोकॉल काफी सख्त थे। मंगलवार को हुए इस मार्च ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी और राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है।

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