दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की मेगा रैली, 1 नवंबर को जुटेंगे दिग्गज
INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर जोर।

विपक्षी दलों का INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल राजनीतिक रैली की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित होने वाली इस रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी अनियमितताओं और कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ आवाज उठाना है। इस आयोजन के लिए दिल्ली पुलिस ने 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक का एनओसी (NOC) दे दिया है। गठबंधन ने इस पूरे अभियान को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' का नाम दिया है, जिसके जरिए वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। विपक्षी दल न केवल उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, बल्कि मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) की प्रक्रिया को रोकने पर भी अड़े हैं। इस रैली से ठीक पहले, 30 अक्टूबर को एक 'मॉक पार्लियामेंट' (नकली संसद) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की योजना है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाता है, तो विरोध प्रदर्शन तुरंत समाप्त कर दिए जाएंगे।
रैली की तैयारियों के बीच बढ़ा विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और के.सी. वेणुगोपाल इस मेगा इवेंट के रणनीतिक समन्वय में जुटे हैं। पार्टी उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में भीड़ जुटाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इस रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में काफी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस, दिवाली और भाई दूज जैसे बड़े त्योहारों के समय इतनी बड़ी रैली से व्यापार को करीब 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है, इसलिए उन्होंने रैली को स्थगित करने की अपील की है।
वहीं, राजनीतिक मोर्चे पर भाजपा ने इस रैली की तारीख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा का आरोप है कि 1 नवंबर को 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है, ऐसे में इस दिन रैली करना पीड़ितों के परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता है। दूसरी ओर, के.सी. वेणुगोपाल ने पुलिस पर बाधा डालने का आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि अशोक होटल के लॉन में पूर्व-रैली कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी गई। हालांकि गठबंधन के भीतर इस आयोजन की व्यवहार्यता को लेकर कुछ बहसें जारी थीं, लेकिन हाल ही में एक वर्चुअल मीटिंग के बाद रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है।