वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप: चुनाव आयोग की ओर मार्च कर प्रदर्शन पर उतरे इंडिया गठबंधन के सांसद

देश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को विपक्षी इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन उस समय चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव के नेतृत्व में सांसदों का एक बड़ा हुजूम संसद भवन से चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर कूच कर निकला। इस मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार, प्रियंका गांधी वाड्रा और अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए, जिन्होंने वोटर लिस्ट में कथित धांधली को लेकर अपना आक्रोश जताया।
विपक्षी नेताओं का गंभीर आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनका दावा है कि 'फॉर्म-7' का इस्तेमाल कर जानबूझकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समुदायों के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और वर्तमान SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान कुछ सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतले भी फूंके, जिन्हें आरएसएस की वर्दी पहनाया गया था।
चुनाव आयोग पर 'बीजेपी मशीन' होने का आरोप
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग अब बीजेपी की 'इलेक्शन मशीन' बन चुका है और आयोग को अपनी बिल्डिंग पर बीजेपी का झंडा लगा लेना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कुंदरकी, मीरापुर, अयोध्या और अंबेडकर नगर जैसी सीटों पर हुए उपचुनावों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे बड़ी साजिश करार दिया। साथ ही, उन्होंने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल एक बार की हेराफेरी से पांच साल तक सत्ता हथियाने की रणनीति है।
इस हंगामे के बीच दिल्ली पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया और ट्रांसपोर्ट भवन के पास बहुस्तरीय बैरिकेडिंग लगाकर सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने चेतावनी दी कि यदि वे आगे बढ़े तो उन्हें नीति आयोग के पास और अधिक सख्ती से रोका जाएगा। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर ही धरने पर बैठकर अपना विरोध जारी रखा।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि उसके तीन सदस्यीय निकाय द्वारा लिए गए सभी निर्णय सर्वसम्मति से होते हैं और इसमें किसी भी तरह का पक्षपात नहीं किया गया है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव इससे पहले भी अगस्त 2025 और साल 2026 में कई बार वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ के मुद्दे पर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।