चुनाव आयोग के खिलाफ सड़कों पर उतरा INDIA गठबंधन, खड़गे ने CEC को बताया 'सरकार की कठपुतली'

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और वोटिंग अधिकारों को लेकर INDIA गठबंधन ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग (EC) के खिलाफ मार्च किया। इस दौरान खड़गे ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार आम जनता के अधिकारों को छीन रही है और चुनाव आयोग पूरी तरह से सरकार के इशारे पर काम कर रहा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें सरकार की 'कठपुतली' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग वही करता है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उन्हें करने के लिए कहते हैं। खड़गे ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाओं का इसी तरह इस्तेमाल होता रहा, तो देश में लोकतंत्र और संविधान खत्म हो जाएगा और 'हिटलर' जैसा शासन लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद मिला वयस्क मताधिकार अब खतरे में है और नागरिकों को फिर से गुलामी की ओर धकेला जा रहा है।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फॉर्म 6-7 पर उठाए सवाल
इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए नागरिकों को उनके मौलिक वोटिंग अधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से फॉर्म 6 और फॉर्म 7 में किए गए बदलावों का जिक्र किया।
- फॉर्म 6: चिदंबरम ने कहा कि नए मतदाताओं के नामांकन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में अब माता-पिता और दादा-दादी के वोटर होने से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।
- फॉर्म 7: उन्होंने आरोप लगाया कि जिस फॉर्म का इस्तेमाल मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए होना चाहिए था, उसका उपयोग बड़े पैमाने पर नाम काटने के लिए किया जा रहा है।
चिदंबरम ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां भाजपा के एक कार्यकर्ता ने 7,000 फॉर्म 7 भरकर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की है। उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वोटर लिस्ट ही गलत होगी, तो उसके आधार पर आने वाले चुनाव परिणामों की कोई वैधता नहीं रहेगी।