इंडिया ब्लॉक की 'चलो दिल्ली' रैली: शशि थरूर ने मांगा CEC का इस्तीफा, सुरजेवाला बोले- यह 'जन क्रांति' है
रामलीला मैदान में जुटे हजारों प्रदर्शनकारियों ने चुनावी गड़बड़ियों का आरोप लगाया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक ने अपनी ताकत दिखाई। 'चलो दिल्ली' विरोध मार्च के तहत हजारों की संख्या में समर्थक और दिग्गज नेता जुटे, जिन्होंने मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
रैली के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। थरूर ने कहा कि जनता का विश्वास अब उनमें नहीं रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार के भीतर थोड़ी भी नैतिक चेतना बची है, तो उन्हें जनता की आवाज सुननी चाहिए और अपने पद से हट जाना चाहिए।
संविधान पर हमले और वोटों की चोरी का लगाया आरोप
वहीं, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने इस भीड़ को एक 'जन क्रांति' की शुरुआत बताया। उन्होंने सरकार पर संविधान पर हमला करने और चुनावी धांधली को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में रामलीला मैदान से जो संदेश गया है, वह पूरे देश में गूंजेगा। उन्होंने दावा किया कि अब 'सम्राट' का सिंहासन डोल रहा है और जनता न तो संविधान पर प्रहार बर्दाश्त करेगी और न ही वोटों की चोरी।
प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं ने भी सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेता कुमारी सेलजा ने कहा कि लाखों लोगों का यह सैलाब बीजेपी सरकार और चुनाव आयुक्त के कामकाज के खिलाफ एक बड़ा विरोध है। उन्होंने दावा किया कि लोगों ने अब इस सरकार को गिराने का फैसला कर लिया है और इस स्थिति को और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस रैली को जनता के गुस्से और असंतोष का प्रतीक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संदेश है कि संविधान किसी का खिलौना नहीं है। गौरतलब है कि यह विरोध मार्च मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंचा, जहाँ विपक्षी नेताओं ने अपनी मांगों को बुलंद किया। यह बड़ा आयोजन शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित एक सार्वजनिक 'महाभियोग' कार्यक्रम के ठीक बाद हुआ है।