वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के खिलाफ इंडिया गठबंधन का हल्ला बोल, 'चलो दिल्ली' रैली में उमड़ी भीड़
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के खिलाफ 'चलो दिल्ली' रैली निकाली। राहुल और अखिलेश समेत कई बड़े नेता रामलीला मैदान पहुंचे।

राजधानी दिल्ली की सड़कें एक बार फिर सियासी हलचल से गूंज उठी हैं। वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के विरोध में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने 'चलो दिल्ली' रैली के जरिए अपना दम दिखाया। 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में विपक्षी खेमे के तमाम दिग्गज एक साथ नजर आए, जिन्होंने रामलीला मैदान में जुटकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
इस रैली की शुरुआत मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से हुई, जहां से नेताओं का काफिला रामलीला मैदान की ओर बढ़ा। प्रदर्शन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे और फारूक अब्दुल्ला जैसे बड़े चेहरे इसमें शामिल हुए। सभी नेता पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एकत्रित हुए और वहां से एक खुली बस में सवार होकर रैली स्थल के लिए रवाना हुए। राहुल गांधी ने इस आंदोलन को 'भारत की आत्मा के लिए मार्च' करार दिया, जबकि विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ट्रैफिक की चुनौती
इतने बड़े जमावड़े को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 4,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को तैनात किया गया। रामलीला मैदान को 14 अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया था, जिसकी निगरानी एसीपी स्तर के अधिकारियों द्वारा की गई। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और बॉडी-वर्न कैमरों का इस्तेमाल किया गया।
डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पुलिस और आयोजकों के बीच एक जॉइंट कंट्रोल रूम बनाया गया था ताकि रूट और वेन्यू पर नजर रखी जा सके। संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई थी। हालांकि, इस रैली के कारण मध्य दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन करना पड़ा, जिससे स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी देखी गई। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन के बीच ट्रैफिक बंद होने से उनके कारोबार पर असर पड़ा है।
दूसरी ओर, इस रैली पर राजनीतिक वार-पलटवार भी शुरू हो गया है। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस प्रदर्शन की आलोचना करते हुए राहुल गांधी पर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।