इंडिया बिएननेल 2026: अब जंतर मंतर बनेगा कला और संस्कृति का मुख्य केंद्र

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इंडिया बिएननेल 2026 में जंतर मंतर एक प्रमुख स्थल होगा। जानें इस भव्य आयोजन की पूरी डिटेल।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
इंडिया बिएननेल 2026: अब जंतर मंतर बनेगा कला और संस्कृति का मुख्य केंद्र

दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर मंतर जल्द ही एक नए और रचनात्मक अवतार में नजर आने वाला है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित होने वाले इंडिया बिएननेल 2026 के लिए जंतर मंतर को एक मुख्य वेन्यू के रूप में चुना गया है। यह आयोजन 4 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 21 मार्च 2027 तक चलेगा, जिसका मकसद दिल्ली को एक आपस में जुड़े हुए सांस्कृतिक कैनवास में बदलना है। खास बात यह है कि हाल ही में 'नो-प्रोटेस्ट जोन' घोषित किए गए जंतर मंतर का सार्वजनिक जुड़ाव के लिए यह पहला बड़ा मौका होगा।

इस भव्य आयोजन की थीम "तत त्वम असि – रिकनेक्टिंग इन एन एज ऑफ डिस्ट्रैक्शन" रखी गई है। इसका उद्देश्य आज के इस भागदौड़ और भटकाव भरे दौर में कला, डिजाइन और वास्तुकला के जरिए आत्म-चिंतन और वैश्विक एकता को बढ़ावा देना है। संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि इस पहल का लक्ष्य भारत को कलात्मक नवाचार के एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करना है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल को देश की विरासत पर गर्व के रूप में देखते हुए कहा कि रचनात्मक क्षेत्रों में यह प्रगति अंततः पूरी मानवता के लिए फायदेमंद होगी।

इन ऐतिहासिक स्थलों पर सजेगा कला का मेला

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इंडिया बिएननेल केवल जंतर मंतर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिल्ली की कई ऐतिहासिक विरासतों को इसमें शामिल किया गया है। इस आयोजन के तहत लाल किला, कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, लोधी गार्डन और पुराना किला जैसे स्मारकों को कला दीर्घाओं में बदला जाएगा। इसके अलावा नेशनल म्यूजियम और ललित कला अकादमी जैसे संस्थान भी इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा होंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में अब तक फ्रांस, इटली, हंगरी, स्विट्जरलैंड और श्रीलंका समेत नौ देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। आयोजकों की योजना 20 से अधिक देशों को इस मंच पर लाने की है।

इस मेगा इवेंट को सफल बनाने के लिए मंत्रालय ने अब वास्तुकारों, क्यूरेटरों, कलाकारों और छात्रों से प्रस्ताव मांगे हैं। इन प्रस्तावों की जांच उनकी मौलिकता और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर की जाएगी। चयनित भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को एक दो-स्तरीय जूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा, ताकि इस देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक आदान-प्रदान मंच की गुणवत्ता और स्तर को बनाए रखा जा सके।

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