एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदकों के साथ लौटे चैंपियन खिलाड़ियों का दिल्ली में जोरदार स्वागत
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने 114 पदकों के साथ रचा इतिहास। दिल्ली एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत।

जापान में आयोजित Asian Para Games 2026 success के बाद भारतीय पैरा-एथलीटों का दल जब दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, तो वहां का नजारा बेहद भावुक और उत्साहजनक था। देश के लिए यह टूर्नामेंट किसी चमत्कार से कम नहीं रहा, क्योंकि भारत ने कुल 114 पदकों का रिकॉर्ड ढेर लगाया है। इन पदकों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं, जिसने भारत को पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा दिया है।
खिलाड़ियों के चेहरे पर जीत की चमक और आंखों में गर्व साफ झलक रहा था। पैरा-बैडमिंटन स्टार थुलासिमती मुरुगेसन ने अपनी इस उपलब्धि को बेहद खास बताया। उन्होंने महिला एकल (SU5) और मिश्रित युगल (SL3-SU5) में रजत और महिला युगल (SL3-SU5) में स्वर्ण पदक जीता। थुलासिमती ने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी पशु चिकित्सा (Veterinary Medicine) की पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना था। उन्होंने अपनी इस जीत को अपने पिता को समर्पित किया।
मेडल विजेताओं ने साझा किए अपने अनुभव
टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले अन्य खिलाड़ियों ने भी अपनी खुशी जाहिर की:
- अशोक कुमार मलिक: पैरा पावरलिफ्टिंग में 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले अशोक ने कहा कि उन्होंने पिछले संस्करण के कांस्य पदक को सिल्वर में बदला है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोच, परिवार और भारत सरकार को दिया और अब अपना लक्ष्य 2028 ओलंपिक को बनाया है।
- अवनी लेखरा: 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग (SH1) में रजत पदक जीतने वाली अवनी ने प्रशंसकों के समर्थन का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि टीम ने पिछले प्रदर्शन की तुलना में काफी सुधार किया है और अगर ऐसा ही प्रोत्साहन मिलता रहा, तो वे हर साल बेहतर करेंगे।
- बेबी सहाना रवि: पैरा टेबल टेनिस में क्लास 9 महिला एकल में कांस्य जीतने वाली बेबी सहाना ने इसे अपने करियर का बड़ा मील का पत्थर बताया। यह स्टैंडिंग कैटेगरी में उनका पहला एशियन गेम्स पदक है।
- प्राची पांडे: क्लास 6 महिला एकल में कांस्य पदक जीतने वाली प्राची ने अपनी सफलता का श्रेय साई गांधी नगर के स्टाफ और अपने कोच अमित सर को दिया।
भारतीय दल की इस ऐतिहासिक जीत ने यह साबित कर दिया है कि सही समर्थन और कड़ी मेहनत से दुनिया के किसी भी मंच पर तिरंगा लहराया जा सकता है। अब सभी खिलाड़ियों की नजरें आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक पर टिकी हैं।