CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, इमरान मसूद बोले- एकजुट है INDIA गठबंधन

देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के तमाम दिग्गज नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि पूरा गठबंधन एकजुट है और सभी नेता लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
विपक्षी नेताओं का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग की। इस मार्च में ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव और CPI व CPM जैसे दलों के बड़े नेता शामिल हुए, जिन्होंने लोकतंत्र को बचाने की बात कही।
लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर खतरे का आरोप
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं और संवैधानिक सुरक्षा खतरे में हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय सत्ताधारी भाजपा के इशारे पर चल रहा है। अमर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जिसे उन्होंने 'वोट चोरी' करार दिया। उन्होंने मांग की कि भाजपा द्वारा जीते गए पिछले चार राज्यों के चुनाव परिणामों को रद्द किया जाना चाहिए और केवल 25 जून से पहले की मतदाता सूची को ही वैध माना जाए।
वहीं, सचिन पायलट ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों और युवाओं के साथ बल प्रयोग किया जा रहा है और नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र मांग यह है कि सुप्रीम कोर्ट उनकी शिकायतों को सुने, क्योंकि CEC का वर्तमान रवैया असंवैधानिक है।
दूसरी ओर, आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) को इस अंधेरे समय में उम्मीद की किरण बताया। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदोरिया और CPI महासचिव डी राजा ने साफ किया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं दे देते और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती।