भारत में रिकॉर्ड अंग प्रत्यारोपण, दिल्ली-NCR ने मारी बाजी और बने नए कीर्तिमान

नई दिल्ली: वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे के मौके पर भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। साल 2025 में देश भर में कुल 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो एक साल में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। इस दौरान दिल्ली-NCR ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीछे छोड़ते हुए 4,564 अंग प्रत्यारोपण के साथ पहला स्थान हासिल किया है। हालांकि, अधिकारियों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि मृत व्यक्ति के अंगों का दान (deceased organ donation) अभी भी एक बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बना हुआ है, क्योंकि कुल प्रत्यारोपण में मृत अंगों का हिस्सा केवल 18% ही है।
अंगों की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर
मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रमुख अंगों के लिए 89,839 लोगों की राष्ट्रीय वेटिंग लिस्ट है, जो मांग और आपूर्ति के बीच के बड़े अंतर को साफ दिखाती है। इस समस्या से निपटने के लिए नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) ने 3 अगस्त 2026 को e-Pratyaropan पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देश भर में अंग दान और प्रत्यारोपण को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा, NOTTO का "Angdaan Karo, Jug Jug Jiyo" जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत 2023 से अब तक 5 लाख से ज्यादा आधार-सत्यापित संकल्प दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि इन संकल्पों को सफल बनाने के लिए परिवारों में चर्चा होना बहुत जरूरी है।
अंग दान क्षेत्र की अन्य प्रमुख चुनौतियां
देश में अंग दान प्रणाली के सामने अभी भी कई तरह की चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें जीवित दाताओं (living donors) पर अत्यधिक निर्भरता, प्रत्यारोपण सुविधाओं में क्षेत्रीय असमानता और जेंडर गैप शामिल है। आंकड़ों के अनुसार, जीवित दाताओं में ज्यादातर महिलाएं हैं जबकि अंग प्राप्त करने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा, कमर्शियल ट्रेडिंग और दबाव से जुड़े नैतिक मुद्दे भी नियामक निकायों की प्राथमिकता में हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे यह परखने का एक बड़ा अवसर है कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज लोगों की जान बचाने के लिए अंग दान को कितना बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि मृत अंग दान की संस्कृति को मजबूत किया जा सके।