लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर खालिस्तानी प्रदर्शन: दिल्ली कोर्ट ने इंडरपाल सिंह गाबा पर लगाया UAPA चार्ज

लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) के बाहर हुए एक विवादित खालिस्तानी विरोध प्रदर्शन के मामले में दिल्ली की एक विशेष NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी इंडरपाल सिंह गाबा के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी इंडरपाल सिंह गाबा UAPA चार्ज के तहत आरोप तय किए हैं। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' के तहत दर्ज आरोपों से बरी कर दिया है।
NIA जज विकास ढुल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस बात का गहरा संदेह है कि आरोपी ने गैरकानूनी गतिविधियों में हिस्सा लिया है, इसलिए उन पर UAPA की धारा 13(1) के तहत मामला चलाया जाएगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान NIA की ओर से वकील अनिल डाबास और आरोपी इंडरपाल सिंह गाबा की पैरवी वकील अरुण खत्री ने की।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा घटनाक्रम 19 मार्च 2023 का है, जब लंदन में भारतीय उच्चायोग की इमारत के सामने लगभग 50-60 प्रदर्शनकारी जमा हुए थे। आरोप है कि ये लोग खालिस्तानी अलगाववादियों के पीले झंडे लेकर आए थे और भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे थे।
जांच के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि हिंसक रूप भी अख्तियार कर लिया। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बालकनी पर चढ़कर भारतीय तिरंगे को अपमानजनक तरीके से नीचे गिराया और उसकी जगह खालिस्तानी झंडा फहराने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उच्चायोग की खिड़कियों और कांच के दरवाजों को लोहे की रॉड से तोड़ दिया, जिससे संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि एक प्रदर्शनकारी ने उच्चायोग की इमारत में घुसकर वहां तैनात अधिकारियों पर लोहे के पाइप से हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाहर खड़े अन्य प्रदर्शनकारी इस हिंसा को उकसा रहे थे और खालिस्तान की मांग कर रहे थे।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोपी के वकील अरुण खत्री ने कहा कि वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि एक विदेशी नागरिक द्वारा विदेशी जमीन पर की गई गतिविधि के लिए NIA द्वारा जुटाए गए सबूतों और मंजूरी की प्रक्रिया का हाई कोर्ट कैसे मूल्यांकन करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।