जामिया यूनिवर्सिटी प्रदर्शन: छात्रों का समर्थन करने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद हिरासत में
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग कर रहे छात्रों का समर्थन करने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छिड़ा संग्राम अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। बुधवार को जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के नेता मोहिबुल्लाह नदवी प्रदर्शनकारी छात्रों का साथ देने कैंपस पहुंचे, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह पूरा मामला यूनिवर्सिटी में 2006 से निलंबित छात्र संघ को दोबारा शुरू करने की मांग से जुड़ा है, जिसे लेकर छात्र लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
हिरासत में लिए जाने के दौरान इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि वह छात्रों की लोकतांत्रिक मांगों के साथ खड़े हैं। कैंपस की दीवारों पर लिखे गए 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे विवादित नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के नारे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश हैं और उनका इस तरह के नारों से कोई लेना-देना नहीं है।
प्रशासन की कमेटी और छात्रों का विरोध
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस विवाद को सुलझाने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस कमेटी को 1988 के जामिया एक्ट और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का अध्ययन कर 20 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्र इस कमेटी को मानने से इनकार कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन तुरंत चुनाव की तारीखों का ऐलान करे और 12 अक्टूबर से उनके खिलाफ शुरू की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए।
तनाव इतना बढ़ गया है कि दिल्ली पुलिस ने कैंपस के चारों ओर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। आरएसएस और एबीवीपी विरोधी नारों के बीच पुलिस हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रख रही है। यूनिवर्सिटी ने प्रदर्शन के लिए गेट नंबर 18 निर्धारित किया है और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत की निगरानी के लिए मेडिकल टीमें भी तैनात की हैं।
बता दें कि यह तनाव अचानक नहीं बढ़ा है। 17 अक्टूबर को उपवास कर रहे छात्रों को जबरन हटाने और उसके बाद सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई झड़पों ने आग में घी का काम किया, जिसके बाद 18 अक्टूबर को कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। अब इस मामले में राजनीतिक दिग्गजों की एंट्री ने इसे और गरमा दिया है।