मौसम विभाग का बड़ा स्पष्टीकरण, चक्रवात नहीं बल्कि डीप डिप्रेशन था सिस्टम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्पष्ट किया है कि जिस वेदर सिस्टम को पहले 'चक्रवात अर्णब' कहा जा रहा था, वह वास्तव में एक डीप डिप्रेशन था। 'अर्णब' नाम भविष्य के किसी तूफान के लिए बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया था। यह सिस्टम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना था और 23-24 सितंबर 2026 की रात को उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट को पार करते हुए कलिंगपट्टनम के पास लैंडफॉल किया था। इस सिस्टम के कारण 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और हवा के झोंके 75 किमी/घंटा तक पहुंचे।
यह डीप डिप्रेशन एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित 16 राज्यों में भारी बारिश का कारण बना। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यह भारी बारिश शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 तक जारी रहने वाली थी।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के राज्य अधिकारियों ने भारी बारिश को देखते हुए बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए। ओडिशा में 5,000 से अधिक लोगों को राहत केंद्रों में पहुंचाया गया और पुरी, नवरंगपुर, जगतसिंहपुर, गंजम, गजपति, कोरापुट, खुर्दा और मलकानगिरी जैसे जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा जैसे इलाकों में भी स्कूलों को बंद रखा गया।
भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण पुलों और सड़कों के बहने जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा धान, सोयाबीन, मक्का और दालों जैसी खड़ी खरीफ फसलों को भी खतरा पैदा हो गया। खराब और खतरनाक समुद्री स्थिति को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की कड़ी चेतावनी दी गई थी।