दिल्ली में 'ग्रीन' के नाम पर बिक रहे अवैध पटाखे, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी बेपरवाह विक्रेता
दिल्ली में ग्रीन सर्टिफिकेट के नाम पर बिक रहे हैं अवैध पटाखे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बाजारों में मिलावट और धांधली जारी है।

राजधानी दिल्ली में त्योहारों की रौनक के बीच एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों और 'ग्रीन सर्टिफिकेट' की अनिवार्यता के बावजूद, शहर के कई इलाकों में अवैध पटाखों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सड़क किनारे बिकने वाले पटाखे 'ग्रीन' होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन असल में वे प्रतिबंधित रसायनों से भरे हुए हैं, जो लोगों की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
सदर बाजार और जामा मस्जिद जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई विक्रेता नकली ग्रीन लेबल लगाकर पटाखे बेच रहे हैं। इन पटाखों पर वह अनिवार्य स्कैन करने योग्य QR कोड नहीं है, जिससे निर्माता की जानकारी, NEERI रजिस्ट्रेशन और PESO/DM लाइसेंस का सत्यापन किया जा सके। नियमों के मुताबिक, केवल CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों की ही अनुमति है, लेकिन बाजार में अब भी बेरियम, लिथियम, मरकरी, आर्सेनिक और कैडमियम जैसे प्रतिबंधित रसायनों वाले पटाखे और 'लाड़ियां' चोरी-छिपे बेचे जा रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और सख्त नियम
दिल्ली पुलिस और जिला प्रशासन ने पिछले कुछ हफ्तों में करीब 1,000 से 1,300 किलोग्राम अवैध पटाखे जब्त किए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि हर जगह सख्ती बरतना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। नियमों के अनुसार, पटाखों की बिक्री केवल 4 से 6 नवंबर 2026 के बीच निर्धारित स्थानों पर ही की जानी थी और ऑनलाइन बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। इसके अलावा, पटाखों के इस्तेमाल के लिए 7 और 8 नवंबर को केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक का समय तय किया गया है।
सरकार ने आम जनता को आगाह किया है कि अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। दिल्ली सरकार और मुख्य सचिव ने नागरिकों से इन नियमों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन वे भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और सूक्ष्म प्रदूषक छोड़ते हैं। इस पूरी स्थिति और प्रतिबंधित उत्पादों की आसान उपलब्धता पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है।