दिल्ली की हवा में जहर घोल रहे हैं वाहन, IITM की लैब ने किया बड़ा खुलासा
IITM की नई लैब ने खुलासा किया कि दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत ट्रांसपोर्ट सेक्टर है। जानें पूरी रिपोर्ट।

देश की राजधानी दिल्ली में हर साल बढ़ने वाले प्रदूषण के कारणों पर अब एक नई और सटीक रिपोर्ट सामने आई है। पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोलॉजी (IITM) की नई प्रयोगशाला ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता का रीयल-टाइम विश्लेषण किया है। इस स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर में PM2.5 के स्तर को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ ट्रांसपोर्ट सेक्टर यानी वाहनों का है।
डेटा के मुताबिक, 21 अक्टूबर को परिवहन क्षेत्र का योगदान 20.5% था, जो 23 अक्टूबर को भी 20.3% के करीब रहा। वहीं, रिहायशी इलाकों से होने वाला प्रदूषण 5.2% और उद्योगों का हिस्सा 4.2% पाया गया। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में दिल्ली की हवा की स्थिति काफी अस्थिर रही। 23 अक्टूबर की सुबह 8 बजे शहर का औसत AQI 223 था, जबकि जहांगीरपुरी और चांदनी चौक जैसे इलाकों में यह 300 के पार (क्रमशः 309 और 307) पहुँच गया था, जिसे 'बेहद खराब' श्रेणी में रखा गया।
GRAP-1 लागू, हजारों चालान और सख्त पाबंदियां
हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के पहले चरण (Stage-I) को लागू कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब AQI अचानक 179 से बढ़कर 244 हो गया। वर्तमान में तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक है और डीजल जनरेटरों के उपयोग पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। अब तक करीब 9,883 चालान काटे जा चुके हैं। साथ ही, 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए 'नो PUCC, नो फ्यूल' पॉलिसी को सख्ती से लागू किया जा रहा है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए बताया कि रोड डस्ट और कचरा जलाने जैसे हॉटस्पॉट्स की निगरानी अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की धीमी रफ्तार (10 किमी प्रति घंटे से कम) और लो वेंटिलेशन इंडेक्स की वजह से प्रदूषक तत्व हवा में ही फंसे रह रहे हैं। इसके अलावा, 22 अक्टूबर को दशहरा के बाद पटाखों के इस्तेमाल ने भी PM2.5 के स्तर को बढ़ाया है। अध्ययन बताते हैं कि त्योहारों पर फूटने वाले पटाखों का असर पराली जलाने की तुलना में PM2.5 स्पाइक्स पर ज्यादा होता है। हालांकि, 24 अक्टूबर को AQI गिरकर 190 तक आया, जो कोविड के समय को छोड़कर पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर था, लेकिन IITM की चेतावनी है कि 26 अक्टूबर तक हवा 'खराब' श्रेणी में ही बनी रहेगी।