आईआईटी दिल्ली छात्र की मौत पर राजनीति से छात्र नाराज, चौथे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी

आईआईटी दिल्ली में 31 वर्षीय एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी बुधवार, 25 अगस्त 2026 को जारी रहा। छात्र की शनिवार, 22 अगस्त 2026 को कथित आत्महत्या से मौत के बाद छात्रों ने प्रदर्शन के राजनीतिकरण पर नाराजगी जताई है। छात्रों ने जेएनयू और डीयू के छात्रों की सक्रिय भागीदारी पर आपत्ति जताई है। एक छात्र सक्षम ने बाहरी राजनीतिक प्रभावों का विरोध करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन संस्थान सुधार और छात्र कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए। इस संकट के कारण संस्थान में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को कक्षाएं स्थगित कर दी गईं और 26 अगस्त को होने वाला सम्मेलन रद्द कर दिया गया।
जांच समिति का गठन और पुलिस कार्रवाई
आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने स्थिति से निपटने के लिए सात सदस्यीय बाहरी जांच समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता कर रही हैं। समिति में एम्स के मनोचिकित्सा प्रमुख, दो छात्र प्रतिनिधि और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल हैं। इससे पहले पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार ने अपनी व्यस्तता के कारण इस भूमिका से हटने का फैसला किया था। दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और पुलिस छात्र के मोबाइल फोन, काउंसलिंग रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
परिवार के आरोप और छात्रों की मांगें
प्रशासन ने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान छात्र को काउंसलिंग सहायता प्रदान करने की बात स्वीकार की है। वहीं, मृतक के परिवार ने संस्थागत उदासीनता का आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार ऋषिकेश 2020 में पिता की मौत के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और पहले भी दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुके थे। प्रशासन ने परिवार के चिकित्सा खर्चों की भरपाई करने और कल्याणकारी कोष से सहायता देने का वादा किया है। इसके बावजूद छात्र निदेशक, डीन, छात्र कल्याण और हॉस्टल प्रबंधन के एसोसिएट डीन तथा भौतिकी विभाग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। इसके अलावा प्रदर्शनकारी मृतक छात्र के परिवार के लिए कम से कम एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं।