आईआईटी दिल्ली ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सीजीपीए की अनिवार्यता खत्म की

आईआईटी दिल्ली ने सत्र 2024-25 से छात्रों के शैक्षणिक दबाव को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। इन बदलावों में बीटेक छात्रों के लिए न्यूनतम सीजीपीए (CGPA) की शर्त को पूरी तरह से हटाना शामिल है। संस्थान ने यह निर्णय छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के उद्देश्य से लिया है।
नया पाठ्यक्रम और पढ़ाई का कम बोझ
2025 में शुरू किए गए नए पाठ्यक्रम के तहत पहले सेमेस्टर में पढ़ाई के भारी बोझ को कम किया गया है। इसमें जीवन कौशल पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं और प्रथम वर्ष की कक्षाओं में छात्रों की संख्या 30 से 60 के बीच सीमित की गई है। इसके अलावा वीकेंड यानी सप्ताहांत पर होने वाली परीक्षाओं की संख्या में भी कमी की गई है।
24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता और इलाज
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए आईआईटी दिल्ली ने 24 घंटे सातों दिन (24/7) काम करने वाली मनोचिकित्सा सहायता प्रणाली शुरू की है। संस्थान ने छात्रों के बाहरी चिकित्सा उपचार का खर्च उठाने का भी फैसला किया है। एम्स (AIIMS) और विमर्श (VIMHANS) के डॉक्टर इन विशेष सेवाओं को देंगे।
अधिकारियों के बयान और अन्य कल्याणकारी कदम
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने बताया कि छात्रों को तुरंत मदद देने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली बनाई जा रही है। शैक्षणिक डीन प्रोफेसर नारायण कुरुड़ ने बताया कि ये फैसले छात्रों की मानसिक चुनौतियों की जांच के लिए बनाई गई समिति की सिफारिश पर लिए गए हैं। इन पहलों में ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और अकादमिक प्रगति समूह की निरंतरता शामिल है जो 2023 से शाम की ट्यूटोरियल और बैकलॉग में मदद कर रहा है। 24 सितंबर 2026 तक के ये उपाय शैक्षणिक लचीलेपन और छात्र कल्याण की ओर बड़ा बदलाव हैं।