प्लास्टिक प्लेट-ग्लास का विकल्प: IIT दिल्ली की सस्टेनेबल पहल ने खींचा सबका ध्यान

IIT दिल्ली प्लास्टिक प्लेट और ग्लास के इको-फ्रेंडली विकल्प पर जोर दे रहा है। जानें कैसे मक्के के कचरे से बन रहा है पैकेजिंग मटेरियल।

Kittu Kumari5 November 20261 min read0 viewsDelhi Local
प्लास्टिक प्लेट-ग्लास का विकल्प: IIT दिल्ली की सस्टेनेबल पहल ने खींचा सबका ध्यान

पर्यावरण को बचाने और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की दिशा में IIT दिल्ली प्लास्टिक विकल्प पर काम करते हुए एक नई मिसाल पेश कर रहा है। संस्थान में प्लास्टिक प्लेट और ग्लास के इको-फ्रेंडली विकल्पों को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है, जिसने एक बार फिर सस्टेनेबिलिटी की चर्चा छेड़ दी है। यह कोशिशें केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति संस्थान की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

IIT दिल्ली ने अपनी रिसर्च और इनोवेशन के जरिए यह साबित किया है कि हम अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना विकल्प ढूंढ सकते हैं। इसी कड़ी में संस्थान के 19वें ओपन हाउस के दौरान 500 से अधिक नवाचार प्रदर्शित किए गए थे, जिनमें एक खास पैकेजिंग फिलर शामिल था। यह फिलर मक्के के कचरे (Corn Waste) से तैयार किया गया है, जो प्लास्टिक पैकेजिंग का एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प बनकर उभरा है।

खेती के कचरे से बन रहे हैं बायो-डिग्रेडेबल उत्पाद

संस्थान की यह मुहिम केवल आज की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। साल 2018 से ही IIT दिल्ली धान के पुआल (Paddy Straw) को पल्प में बदलकर बायो-डिग्रेडेबल उत्पाद बनाने की संभावनाओं पर शोध कर रहा है। यह प्रयास न केवल प्लास्टिक कचरे को कम करेगा, बल्कि किसानों द्वारा पराली जलाने की समस्या का भी समाधान दे सकता है।

इसी तरह की एक बड़ी उपलब्धि IIT रुड़की में भी देखी गई, जहां प्रोफेसर विभोर कुमार रस्तोगी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने गेहूं के भूसे से डिस्पोजेबल बर्तन तैयार किए। भारत के ये प्रमुख संस्थान मिलकर सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण मिल सके।

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