आईएचबीएएस और सीआईएसएफ के बीच जवानों की मानसिक सेहत सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे।
इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस) और
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने जवानों की मानसिक भलाई के लिए तीन साल के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को हुआ और इसकी आधिकारिक जानकारी 26 सितंबर 2026 को दी गई। इस हस्ताक्षर समारोह में सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन और आईएचबीएएस निदेशक प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र कुमार धामीजा शामिल हुए। इस समझौते का उद्देश्य मनोवैज्ञानिक कल्याण, तनाव प्रबंधन और नैदानिक सहायता को मजबूत करना है।
समझौते के तहत सीआईएसएफ कर्मियों के लिए विशेष साइकोमेट्रिक आकलन किए जाएंगे। इसमें संसद भवन परिसर में तैनात होने वाले कर्मचारियों और संवेदनशील इकाइयों के जवानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि उनके मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके। इस कार्यक्रम के माध्यम से आईएचबीएएस की ओपीडी और इनपेशेंट सुविधाओं के जरिए काउंसलिंग, मनोरोग उपचार और नशामुक्ति सेवाएं भी दी जाएंगी।
इस पहल के तहत सीआईएसएफ के पर्यवेक्षी और चिकित्सा कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि व्यवहार संबंधी चेतावनी के संकेतों, तीव्र तनाव और मानसिक आपात स्थितियों का समय पर पता लगाया जा सके। बल में मानसिक स्वास्थ्य मास्टर ट्रेनर तैयार करने के लिए 'ट्रेनिंग-ऑफ-ट्रेनर' कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। इसके अलावा, जवानों को 24 घंटे आपातकालीन सहायता के लिए टेली-मानस (14416) हेल्पलाइन की सुविधा मिलेगी और बल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने बताया कि इस साझेदारी का उद्देश्य समस्याओं की समय पर पहचान करना और पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल लेने से जुड़े डर को कम करना है।