IFQM Symposium 2026: गुणवत्ता और नवाचार से भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई दिल्ली में होगा बड़ा आयोजन

Kittu Kumari29 September 20262 min read0 viewsNational
IFQM Symposium 2026: गुणवत्ता और नवाचार से भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई दिल्ली में होगा बड़ा आयोजन

भारतीय गुणवत्ता प्रबंधन फाउंडेशन (IFQM) द्वारा नई दिल्ली में 5 से 6 अक्टूबर 2026 को अपने वार्षिक दो दिवसीय IFQM संगोष्ठी के तीसरे संस्करण का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष का केंद्रीय विषय "Quality, Innovation and Excellence as India’s Force Multiplier" रखा गया है। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संगठनों को गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और निर्यात-सक्षम बनाना है। इस संगोष्ठी के संबंध में अधिक जानकारी के लिए ifqm.org.in और events.ifqm.org.in पर जा सकते हैं, तथा कंपनी के अपडेट्स www.linkedin.com/company/ifqm पर देखे जा सकते हैं।

फार्मा और लाइफ साइंसेज सहित कई नए क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस

2026 के इस संस्करण में फार्मा और लाइफ साइंसेज ट्रैक की शुरुआत की जाएगी और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। फार्मा और लाइफ साइंसेज सेक्टर में भारत जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़कर अभिनव दवाओं की ओर बढ़ने के रास्तों पर विचार करेगा। पैनल चर्चा में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारत के बुनियादी ढांचे को फिर से तैयार करने पर बहस होगी। इस आयोजन में वेणु श्रीनिवासन, एन. चंद्रसेकरण, दिलीप सांघवी, डॉ. किरण मजूमदार-शॉ और एस.एन. सुब्रह्मण्यन जैसे देश के शीर्ष उद्योगपति और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय वक्ता भाग लेंगे।

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दो दिवसीय कार्यक्रम में 25 से अधिक सत्रों का होगा आयोजन

यह संगोष्ठी दो दिनों तक चलेगी जिसमें 25 से अधिक सत्र और 50 से अधिक वक्ता शामिल होंगे। पहले दिन 'Viksit Bharat' और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने पर मुख्य सत्र होंगे, जिसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया भी शामिल होंगे। दूसरे दिन की शुरुआत नागरिक उड्डयन और एआई के उपयोग पर सत्रों के साथ होगी। IFQM के सीईओ और निदेशक सौमित्र भट्टाचार्य ने बताया कि भारत के विकसित भारत के सपने के लिए गुणवत्ता और नवाचार को राष्ट्रीय बल गुणक बनाना जरूरी है।

एमएसएमई की भूमिका और वैश्विक साझेदारी

गत वर्ष के सम्मेलन के मुख्य निष्कर्षों में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया था। एमएसएमई को वित्त, प्रौद्योगिकी, कौशल और बुनियादी ढांचे तक बेहतर पहुंच की आवश्यकता है। 2026 के एजेंडे में 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने और उद्योग-अकेडमिया साझेदारी पर चर्चा की जाएगी। IFQM की स्थापना 2023 में भारतीय उद्योगों में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के लिए की गई थी, जो भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का समर्थन करती है।

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