IFQM Symposium 2026: दिल्ली में संपन्न हुआ आयोजन, MSME में क्वालिटी अपनाने पर दिया जोर

देश की राजधानी दिल्ली में 5 और 6 अक्टूबर को आयोजित IFQM Symposium 2026 का तीसरा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (IFQM) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को क्वालिटी प्रोसेस अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर MSMEs डिजाइन से लेकर डिलीवरी तक हर स्तर पर गुणवत्ता को प्राथमिकता देंगे, तभी भारत वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ा पाएगा।
इस दो दिवसीय आयोजन में 300 से अधिक सीईओ, सीएक्सओ और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ-साथ 50 शैक्षणिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के पहले दिन केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने संबोधित किया। उन्होंने इस सिंपोजियम के लक्ष्यों को 'विकसित भारत@2047' और 'आत्मनिर्भरता' के विजन से जोड़ते हुए बताया कि गुणवत्ता ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने की कुंजी है।
ग्लोबल हब बनने की तैयारी और नए प्रोग्राम की शुरुआत
दूसरे दिन नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने 'विंग्स ऑफ विकसित भारत' विषय पर अपना मुख्य भाषण दिया। उन्होंने भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की बात कही और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए निर्माताओं और ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) से अपील की।
सिंपोजियम के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए MSMEs के लिए एक विशेष लीडरशिप प्रोग्राम लॉन्च किया गया। इस प्रोग्राम का मकसद नॉलेज शेयरिंग, वेस्ट रिडक्शन (अपशिष्ट कम करना) और इनोवेशन को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के बीच तालमेल बिठाने के लिए कार्लसरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इस आयोजन में वेणु श्रीनिवासन (चेयरमैन), एन. चंद्रशेखरन, दिलीप सांघवी, एस.एन. सुब्रमण्यन और सीईओ सौमित्र भट्टाचार्य जैसे दिग्गजों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में हुंडई मोटर ग्रुप, रॉबर्ट बॉश GmbH और DMG MORI जैसी वैश्विक संस्थाओं की उपस्थिति ने इसे और प्रभावी बनाया, जिससे उद्योग और सरकार के बीच एक साझा एक्शन प्लान तैयार हो सका है।