IB Officer Ankit Sharma Murder: दिल्ली दंगे में आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या के 6 साल बाद भी परिवार गहरे गम में, दोषियों को उम्रकैद

दिल्ली में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगे के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या को 6 साल पूरे हो चुके हैं। इस मामले में पूर्व आप (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद भी उनका परिवार गहरे गम से जूझ रहा है। अंकित शर्मा के परिवार के लिए समय 25 फरवरी 2020 को ही थम गया है, जो कि वह दिन था जब 26 साल के अंकित लापता हुए थे। उनके भाई अंकित शर्मा ने उस रात की घटनाओं और अपने कभी न खत्म होने वाले दर्द को याद किया है।
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन के साथ-साथ नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को अंकित शर्मा की हत्या के मामले में सजा सुनाई। इन सभी को 13 जुलाई 2026 को दोषी ठहराया गया था। अंकित शर्मा का शव उनके लापता होने के एक दिन बाद घर से सिर्फ 200-300 मीटर दूर एक नाले में मिला था। उनके शरीर पर 51 बाहरी चोटें थीं, जिनमें कई बार चाकू से किए गए घाव शामिल थे। व्यापक सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई 53 मौतों में वह भी शामिल थे। एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने इस अपराध को "बेहद गंभीर" बताया और कहा कि इसने "समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया है"। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह अपराध "अत्यंत क्रूरता" के साथ "केवल धार्मिक आधार पर" किया गया, जिसमें शव के साथ "अत्यंत अपमानजनक" व्यवहार किया गया और उसे "एक जानवर की तरह" घसीटा गया।
सजा और आगे की कानूनी कार्रवाई
अंकित शर्मा के भाई अंकुर शर्मा ने उम्रकैद के फैसले पर अपनी गहरी नाराजगी जताई है। अंकुर शर्मा ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की है और कहा है कि यह मामला "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" (सबसे दुर्लभ) की श्रेणी में आता है। हालांकि, दिल्ली पुलिस की मौत की सजा की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सबूत कानूनी पैमाने पर खरे नहीं उतरते और अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि दोषियों में सुधार नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर, ताहिर हुसैन ने खुद को बेकसूर बताया है। उन्होंने इस ट्रायल को "फिक्स्ड मैच" करार दिया है और दिल्ली हाईकोर्ट में इस सजा को चुनौती देने की बात कही है।