नई दिल्ली में IASRM वर्ल्ड कांग्रेस संपन्न, लॉन्जिविटी मेडिसिन पर दिया जोर

राजधानी दिल्ली के होटल द ललित में आयोजित 11वां इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टेम सेल एंड रिजनरेटिव मेडिसिन (IASRM) वर्ल्ड कांग्रेस सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 'लॉजिविटी रिवोल्यूशन 2026' थीम पर आधारित यह तीन दिवसीय आयोजन 3 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुआ, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञों ने स्वस्थ उम्र और रिजनरेटिव थेरेपी के भविष्य पर गहन मंथन किया।
इस कांग्रेस में कुल 91 फैकल्टी सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और क्लिनिकल प्रैक्टिस में आ रहे बदलावों पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान 20 वैज्ञानिक सत्र और तीन व्यावहारिक वर्कशॉप आयोजित किए गए, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों ने 12 सीएमई (CME) क्रेडिट घंटे हासिल किए।
मेडिकल साइंस की नई तकनीकों पर चर्चा
सम्मेलन में स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बात की गई। विशेषज्ञों ने मेटाबॉलिक हेल्थ, गट माइक्रोबायोम, डिटॉक्सिफिकेशन और पेप्टाइड थेरेप्यूटिक्स जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, स्टेम-सेल के अनुप्रयोगों को ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, एस्थेटिक्स, इनफर्टिलिटी और वैस्कुलर बीमारियों के इलाज में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में CAR-T थेरेपी, जीनोम एडिटिंग और सेल-कल्चर की नई तकनीकों जैसे एडवांस विषयों को भी शामिल किया गया था। IASRM के संस्थापक और आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रभु चंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रतिभागियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और आखिरी सत्र तक हॉल पूरी तरह भरे रहे। इस आयोजन टीम में डॉ. लावन्या किरण और डॉ. युक्ति वधवान ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर उन प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने IASRM फेलोशिप ट्रेनिंग पूरी की। साथ ही, फैकल्टी सदस्यों को अपने प्रेजेंटेशन को रिसर्च पेपर में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साल 2014 से रिजनरेटिव मेडिसिन कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा यह संगठन अब 'हेल्थस्पैन स्टैंडर्ड समिट' की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य लॉन्जिविटी और फंक्शनल मेडिसिन के लिए नए मानक स्थापित करना है।