एयर प्यूरीफायर के डिस्प्ले पर न जाएं, एक्सपर्ट्स ने बताया असली प्रभावशीलता जांचने का तरीका
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के बीच एक्सपर्ट्स ने बताया कि एयर प्यूरीफायर के डिजिटल डिस्प्ले पर भरोसा करने के बजाय किन बातों का ध्यान रखें।

दिल्ली-NCR समेत पूरे देश में बढ़ते प्रदूषण के स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल मशीन पर दिख रहे डिजिटल नंबरों (रीडआउट) के आधार पर यह मान लेना गलत है कि आपके घर की हवा पूरी तरह शुद्ध हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिवाइस के डिस्प्ले पर भरोसा करने के बजाय इसकी वास्तविक कार्यक्षमता को समझना जरूरी है।
राजधानी में प्रदूषण की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। 28 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 197 से बढ़कर 229 तक पहुंच गया, जिससे हवा की गुणवत्ता 'मध्यम' से गिरकर 'खराब' श्रेणी में आ गई। विवेक विहार जैसे इलाकों में तो हालात और भी चिंताजनक रहे, जहां AQI 316 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी यही ट्रेंड देखा गया, जहां PM2.5 मुख्य प्रदूषक पाया गया और इसके पीछे परिवहन को एक बड़ा कारण माना गया है।
प्यूरीफायर खरीदते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
मैक्स अस्पताल, साकेत के थोरेसिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. कमरान अली के अनुसार, HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर घर के अंदर PM2.5 के स्तर को कम करने में मददगार तो होते हैं, लेकिन वे फेफड़ों को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कर सकते। उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि प्यूरीफायर खरीदते समय केवल ब्रांड न देखें, बल्कि कुछ तकनीकी पहलुओं पर गौर करें:
- CADR रेट: क्लीन एयर डिलीवरी रेट (CADR) कमरे के आकार के हिसाब से सही होना चाहिए।
- HEPA सर्टिफिकेशन: सुनिश्चित करें कि फिल्टर असली और प्रमाणित HEPA हो।
- रखरखाव का खर्च: फिल्टर बदलने का खर्च और समय पहले से जान लें।
- ओजोन उत्सर्जन: ऐसे मॉडल्स से बचें जो ओजोन गैस उत्सर्जित करते हैं, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी याद दिलाया कि समय-समय पर फिल्टर बदलना बेहद जरूरी है, वरना मशीन की प्रभावशीलता खत्म हो जाती है। गौरतलब है कि प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी दिवाली के बाद हवा की गुणवत्ता में संभावित गिरावट पर गहरी चिंता जताई है।