दिल्ली का ऐतिहासिक सफर: सात प्राचीन शहरों से रायसीना हिल्स तक की कहानी

जानिए कैसे सात प्राचीन शहरों से गुजरते हुए दिल्ली रायसीना हिल्स तक पहुँची और बनी देश की राजधानी।

Kittu Kumari1 November 20261 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली का ऐतिहासिक सफर: सात प्राचीन शहरों से रायसीना हिल्स तक की कहानी

दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि सदियों के इतिहास की एक जीती-जागती किताब है। पत्रकार आशुतोष झा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का दिल्ली का ऐतिहासिक विकास इतना दिलचस्प रहा है कि इसे सात बार बसाया और सात बार उजारा गया। इंद्रप्रस्थ की प्राचीन गलियों से लेकर आज की आधुनिक रायसीना हिल्स तक, इस शहर ने सत्ता के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

इतिहास की परतों को पलटें तो पता चलता है कि दिल्ली की शुरुआत इंद्रप्रस्थ से हुई। इसके बाद तोमर वंश के समय 'लाल कोट', चौहान वंश के दौर में 'किला राय पिथौरा', अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बसाया गया 'सिरी', गयासुद्दीन तुगलक का 'तुगलकाबाद', फिरोज शाह तुगलक का 'फिरोजाबाद' और अंत में मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा निर्मित 'शाहजहानाबाद' ने इस शहर को आकार दिया। ये सात शहर दिल्ली की उस विरासत की गवाही देते हैं, जिसने इसे दुनिया के सबसे पुराने बसे हुए शहरों में से एक बनाया है।

ब्रिटिश राज और नई दिल्ली का उदय

दिल्ली के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साल 1911 में आया, जब अंग्रेजों ने अपनी राजधानी को कलकत्ता से बदलकर दिल्ली करने का फैसला किया। प्रशासनिक केंद्र के लिए रायसीना हिल्स को चुना गया। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए करीब 1,700 एकड़ जमीन ली गई, जिसमें रायसीना समेत लगभग 150 गांवों को विस्थापित करना पड़ा।

ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर की देखरेख में यहाँ राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और नॉर्थ व साउथ ब्लॉक जैसी भव्य इमारतों का निर्माण हुआ। साल 1931 में आधिकारिक तौर पर नई दिल्ली का उद्घाटन किया गया। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलते ही दिल्ली को स्वतंत्र भारत की राजधानी घोषित कर दिया गया। आज ये ऐतिहासिक परतें और शानदार वास्तुकला दिल्ली को देश की धड़कन बनाती हैं।

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